Iran–US–Israel conflict: 20 हजार डॉलर के ड्रोन को गिराने के लिए 40 लाख रुपये की मिसाइल का इस्तेमाल, अमेरिका ईरान के जाल में फंस गया है!

Iran–US–Israel conflict

Hind18: Iran-US-Israel conflict वॉशिंगटन/तेहरान अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष अब पांचवें दिन भी अंधकारमय दौर में प्रवेश कर चुका है।

युद्ध अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां जीत का गणित सैन्य शक्ति के बजाय ‘हथियारों के भंडार’ में कौन अधिक समय तक टिक सकता है,

इस पर निर्भर करता है।

ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपने ‘शाहिद-136’ आत्मघाती ड्रोन से निशाना बनाया है,

इन ड्रोनों ने बहरीन से लेकर संयुक्त अरब अमीरात तक अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भारी तबाही मचाई है।

हालांकि, इन सबके बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका अब ईरान के जाल में फंस रहा है?

Iran-US-Israel conflict : महंगी मिसाइलें बनाम सस्ते ड्रोन

इस युद्ध में, अमेरिकी ‘पैट्रियट एयर डिफेंस’ प्रणाली ईरानी ड्रोनों को रोकने में 90 प्रतिशत तक सफल रही है।

हालांकि, इससे एक बड़ी वित्तीय समस्या खड़ी हो गई है।

एक ईरानी ड्रोन की कीमत लगभग 20 हजार डॉलर (लगभग 16-18 लाख रुपये) है,

लेकिन उसे मार गिराने के लिए अमेरिका को 40 लाख डॉलर (लगभग 33 करोड़ रुपये) की मिसाइल दागनी पड़ती है।

यह लागत अमेरिका के लिए एक बड़ी सिरदर्द बन रही है।

ईरान की रणनीति क्या है?

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विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान धीरे-धीरे दुश्मन को थकाने की रणनीति अपना रहा है (घर्षण युद्ध)।

ईरान का अनुमान है कि लगातार ड्रोन हमलों से अमेरिका और खाड़ी देशों की महंगी मिसाइलें खत्म हो जाएंगी,

जिससे उन पर युद्ध रोकने के लिए राजनीतिक दबाव बनेगा।

इसके अलावा, यह भी कहा जाता है कि ईरान अंतिम चरण में महत्वपूर्ण और विनाशकारी मिसाइलों का इस्तेमाल कर सकता है।

ड्रोन हमलों को न रोकने पर अमेरिका भारी नुकसान की दोहरी मार झेल रहा है,

और इन ड्रोनों को रोकने के लिए महंगी मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

किसी के पास कितना गोला-बारूद बचा है?

युद्ध की शुरुआत में ईरान के पास लगभग 2,000 बैलिस्टिक मिसाइलें थीं।
अब तक ईरान 1,200 से अधिक मिसाइलें और ड्रोन दाग चुका है।
ऐसा लगता है कि ईरान अभी भी अपनी सबसे घातक मिसाइलों को बचाकर रख रहा है।
इजराइल का दावा है कि उसने ईरान के 150 मिसाइल लॉन्चरों को नष्ट कर दिया है।
हालांकि, ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका ने अभी तक इस क्षेत्र में लंबे युद्ध के लिए पर्याप्त हथियार नहीं भेजे हैं।
अमेरिका को ईरान से इतने कड़े प्रतिरोध की उम्मीद नहीं थी।
इसलिए, अमेरिका के पास कुछ ही दिनों के लिए हथियारों का भंडार था।
लेकिन अब संकेत मिल रहे हैं कि युद्ध लंबा चलेगा।
वर्तमान में, ईरान की वायु रक्षा प्रणाली कमजोर है और रूस से प्राप्त आधुनिक एस-300 प्रणाली भी विफल हो चुकी है।
इसके चलते अमेरिकी और इजरायली लड़ाकू विमान ईरान के आसमान में बेरोकटोक उड़ान भर रहे हैं।
यदि यही स्थिति बनी रही, तो कुछ ही दिनों में दोनों पक्षों के पास आक्रमण या रक्षा के साधन खत्म हो जाएंगे और युद्ध रुक जाएगा।

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