Hind18: Digital Arrest Scam का एक बेहद चौंकाने वाला मामला मुंबई से सामने आया है,
जहां साइबर अपराधियों ने एक वरिष्ठ नागरिक को डिजिटल तरीके से बंधक बनाकर उनसे 2.5 करोड़ रुपये की ठगी कर ली।
इस मामले में साइबर पुलिस (उत्तरी डिवीजन) ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान किशन मकवाना के रूप में हुई है।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को बैंक खाता उपलब्ध कराया था, जिसके जरिए ठगी की रकम ट्रांसफर की गई।
यह घटना मुंबई के पश्चिमी उपनगर में रहने वाले एक बुजुर्ग के साथ हुई।
शिकायत के अनुसार नवंबर महीने में उन्हें व्हाट्सएप पर एक कॉल आया।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और कहा कि उनके खिलाफ गंभीर आर्थिक अपराध की जांच चल रही है।
कॉल के दौरान उन्हें बताया गया कि उनके नाम से जुड़े बैंक खाते से आतंकवादियों को करोड़ों रुपये भेजे गए हैं।
अपराधियों ने पीड़ित को डराने के लिए कहा कि इस मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी और लखनऊ एटीएस कर रही हैं।
कॉल करने वालों ने दावा किया कि यह मामला बेहद गंभीर है और अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
इसी डर का फायदा उठाकर अपराधियों ने बुजुर्ग को लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में रखा।
इस दौरान ठगों ने पीड़ित को कई फर्जी दस्तावेज भी भेजे।
इनमें एक नकली नोटिस भी शामिल था, जिस पर महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक के नाम और फर्जी हस्ताक्षर दिखाए गए थे।
इस नोटिस के जरिए बुजुर्ग को विश्वास दिलाया गया कि उनके खिलाफ आधिकारिक जांच चल रही है।
इसके बाद अपराधियों ने एक नई कहानी गढ़ी।
Digital Arrest Scam
उन्होंने कहा कि बुजुर्ग के आधार कार्ड का इस्तेमाल करके एक बैंक खाता खोला गया है और उसी खाते से संदिग्ध लेनदेन हुआ है।
ठगों ने दावा किया कि उस खाते में करीब 70 लाख रुपये कमीशन के रूप में जमा हुए हैं।
इस वजह से उनके सभी बैंक खातों की जांच जरूरी है।
अपराधियों ने खुद को जांच अधिकारी बताते हुए कहा कि जांच प्रक्रिया के तहत बुजुर्ग को अपनी पूरी रकम एक “सुरक्षित सरकारी खाते” में अस्थायी रूप से ट्रांसफर करनी होगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रक्रिया गोपनीय है और अगर उन्होंने किसी से इस बारे में बात की तो उन्हें कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
लगातार मानसिक दबाव और डर के कारण बुजुर्ग अपराधियों की बातों में आ गए।
उन्होंने अलग-अलग बैंक खातों से कुल 2.5 करोड़ रुपये बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए।
पैसे ट्रांसफर होने के बाद अपराधियों ने संपर्क करना बंद कर दिया, जिसके बाद उन्हें ठगी का एहसास हुआ।
इसके बाद पीड़ित ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बैंक लेनदेन और डिजिटल ट्रेल की जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि ठगी की रकम जिन खातों में ट्रांसफर हुई थी, उनमें से एक खाता गुजरात से जुड़ा हुआ था।
पुलिस ने तकनीकी जांच के आधार पर किशन मकवाना को गिरफ्तार किया।
जांच में सामने आया कि उसने कमीशन के बदले साइबर अपराधियों को बैंक खाता उपलब्ध कराया था।
इसी खाते के जरिए ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी। पुलिस अब इस पूरे साइबर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश कर रही है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार Digital Arrest Scam हाल के समय में तेजी से बढ़ता हुआ अपराध है।
इस तरह के मामलों में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, एनआईए या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं।
फिर उन्हें लगातार वीडियो कॉल या फोन पर संपर्क में रखकर मानसिक दबाव बनाया जाता है।
कई मामलों में अपराधी फर्जी दस्तावेज, नकली नोटिस और सरकारी अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल करते हैं ताकि पीड़ित को भरोसा हो जाए कि मामला असली है।
इसी भरोसे और डर के कारण कई लोग अपनी जमा पूंजी तक ट्रांसफर कर देते हैं।
भारत सरकार ने ऐसे साइबर अपराधों से बचाव के लिए एक आधिकारिक पोर्टल भी बनाया है जहां लोग शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
अधिक जानकारी के लिए https://cybercrime.gov.in पर जाकर रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है।
इसके अलावा साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव से जुड़ी जानकारी भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम की वेबसाइट https://www.cert-in.org.in पर भी उपलब्ध है,
जहां डिजिटल सुरक्षा से जुड़े कई दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि किसी भी सरकारी एजेंसी का अधिकारी फोन या व्हाट्सएप के जरिए लोगों से पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता।
अगर किसी को इस तरह की कॉल आती है तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर कोई व्यक्ति खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर बैंक खाते की जानकारी या पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता है,
यह लगभग निश्चित रूप से साइबर ठगी का संकेत होता है। ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
मुंबई में सामने आया यह Digital Arrest Scam का मामला इस बात का उदाहरण है कि साइबर अपराधी अब लोगों को फंसाने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव और तकनीकी साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
इसलिए डिजिटल दुनिया में सतर्क रहना और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश पर भरोसा न करना बेहद जरूरी है।















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