HPV Vaccination Campaign: 7 अहम बातें जो हर माता-पिता को जाननी चाहिए – एचपीवी टीकाकरण अभियान से बेटियों को मिलेगा मजबूत सुरक्षा कवच….!

HPV Vaccination Campaign

Hind18: HPV Vaccination Campaign भारत में महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बनकर सामने आया है।

राज्य के जन स्वास्थ्य विभाग ने 9 मार्च से पुणे जिले में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस यानी एचपीवी के खिलाफ व्यापक टीकाकरण अभियान शुरू किया है।

इस अभियान का उद्देश्य किशोरियों को भविष्य में होने वाले सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाना है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इस अभियान को सफल बनाने के लिए जिला स्तर पर विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई है।

अधिकारियों ने स्कूलों, स्वास्थ्य केंद्रों और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से टीकाकरण को प्रभावी तरीके से लागू करने की रणनीति बनाई है।

इस पहल के माध्यम से बड़ी संख्या में किशोरियों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया है ताकि भविष्य में कैंसर जैसी घातक बीमारी के मामलों को कम किया जा सके।

पुणे जिले में इतने बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य

पुणे जिले में चल रहे HPV Vaccination Campaign के तहत कुल 98,907 लड़कियों को टीकाकरण के दायरे में लाया गया है।

इनमें ग्रामीण क्षेत्रों की 41,387 लड़कियां शामिल हैं।

इसके अलावा पुणे नगर निगम क्षेत्र की 33,000 और पिंपरी-चिंचवड नगर निगम क्षेत्र की 24,520 लड़कियों को टीका लगाने का लक्ष्य तय किया गया है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह अभियान स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से चलाया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक किशोरियों तक पहुंच बनाई जा सके।

प्रशासन का प्रयास है कि निर्धारित समय में सभी लक्षित लड़कियों का टीकाकरण पूरा हो सके।

सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बड़ा कदम

दुनियाभर में लाखों महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित हो रही हैं।

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इस कैंसर के लगभग 99.7 प्रतिशत मामलों के पीछे एचपीवी संक्रमण मुख्य कारण होता है।

यह वायरस लंबे समय तक शरीर में रहने पर कैंसर का रूप ले सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठनों और स्वास्थ्य एजेंसियों ने 2030 तक सर्वाइकल कैंसर को खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इसके लिए वैश्विक स्तर पर कई स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

इस दिशा में भारत में भी टीकाकरण और जागरूकता अभियान तेज किए जा रहे हैं।

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए तीन प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं।

पहला, 15 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों में एचपीवी टीकाकरण की दर को 2030 तक 90 प्रतिशत तक पहुंचाना।

दूसरा, 35 वर्ष की उम्र तक कम से कम 70 प्रतिशत महिलाओं की स्क्रीनिंग करना और 45 वर्ष की आयु में दोबारा स्क्रीनिंग सुनिश्चित करना।

तीसरा, इस बीमारी से पीड़ित 90 प्रतिशत महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराना।

सर्वाइकल कैंसर और एचपीवी के बारे में अधिक जानकारी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की वेबसाइट https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/human-papillomavirus-hpv-and-cervical-cancer पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध है।

एचपीवी वैक्सीन क्या है और कैसे काम करती है

HPV Vaccination Campaign के तहत क्वाड्रिवेलेंट एचपीवी वैक्सीन का उपयोग किया जा रहा है।

इस वैक्सीन का नाम गार्डासिल है और इसे तरल रूप में दिया जाता है।

यह टीका शरीर में एचपीवी वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है।

जब शरीर में वायरस प्रवेश करता है तो प्रतिरक्षा तंत्र उसे पहचान कर नष्ट करने की क्षमता विकसित कर लेता है।

इससे भविष्य में संक्रमण और उससे जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

एचपीवी वैक्सीन को दुनिया के कई देशों में लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा है और इसे सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है।

वैक्सीन से जुड़ी विस्तृत जानकारी भारत सरकार के स्वास्थ्य पोर्टल https://www.mohfw.gov.in पर भी उपलब्ध है।

अब एक ही डोज से मिलेगी सुरक्षा

पहले एचपीवी टीकाकरण में दो या तीन खुराक देने की व्यवस्था थी।

लेकिन हाल के शोध और वैज्ञानिक अध्ययनों के आधार पर केंद्र सरकार ने एक नई प्रणाली अपनाई है।

अब 14 वर्ष या उससे अधिक उम्र की लड़कियों को केवल एक खुराक दी जा रही है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह एक खुराक दो खुराकों के बराबर प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है और लंबे समय तक प्रतिरक्षा बनाए रखने में सक्षम है।

इस नई व्यवस्था से टीकाकरण कार्यक्रम को तेज गति से लागू करना आसान हो गया है।

साथ ही अधिक से अधिक बच्चों को कम समय में कवर किया जा सकता है।

14 वर्ष की लड़कियों पर विशेष ध्यान

HPV Vaccination Campaign के तहत मुख्य रूप से 14 वर्ष की लड़कियों को टीका लगाया जा रहा है।

इसमें वे लड़कियां शामिल हैं जिन्होंने अपना 14वां जन्मदिन मना लिया है लेकिन अभी 15 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है।

टीका 0.5 मिलीलीटर की मात्रा में लगाया जाता है और इसे बाएं हाथ के ऊपरी हिस्से में इंजेक्शन के रूप में दिया जाता है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का मानना है कि किशोरावस्था में टीकाकरण करने से वायरस से बचाव की क्षमता अधिक मजबूत बनती है।

इसलिए इस आयु वर्ग को प्राथमिकता दी जा रही है।

स्कूलों में जागरूकता अभियान

इस HPV Vaccination Campaign को सफल बनाने के लिए स्कूलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।

विद्यार्थियों के साथ-साथ उनके अभिभावकों को भी एचपीवी वायरस और सर्वाइकल कैंसर के बारे में जानकारी दी जा रही है।

शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं।

स्कूलों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा टीकाकरण के महत्व पर चर्चा की जा रही है ताकि माता-पिता बिना किसी संकोच के अपनी बेटियों को टीका लगवाने के लिए प्रेरित हों।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जागरूकता बढ़ने से टीकाकरण कार्यक्रम की सफलता की संभावना भी बढ़ जाती है।

नागरिकों से सहयोग की अपील

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामचंद्र हंकरे ने नागरिकों से इस अभियान में सहयोग करने की अपील की है।

उनका कहना है कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के स्वास्थ्य को सुरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने बताया कि जिन अभिभावकों को टीकाकरण से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए वे स्वास्थ्य विभाग के टोल-फ्री नंबर 104 पर संपर्क कर सकते हैं।

यहां विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन दिया जाएगा।

HPV Vaccination Campaign केवल एक स्वास्थ्य कार्यक्रम नहीं बल्कि महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

इसके माध्यम से किशोरियों को समय रहते सुरक्षा प्रदान कर सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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