Hind18: Ovary Trafficking Racket को लेकर देशभर में हड़कंप मचा हुआ है।
बदलापुर से सामने आए सनसनीखेज खुलासों ने यह संकेत दिया है कि
गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को पैसों का लालच देकर उनके अंडाणु (Eggs) निकालने का संगठित रैकेट सक्रिय हो सकता है।
प्रारंभिक जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क की जड़ें महाराष्ट्र से लेकर कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल तक फैली हो सकती हैं।
यह मामला जितना साधारण दिखता है, उतना है नहीं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह संगठित मानव शोषण का मामला हो सकता है,
जिसमें दलाल, कुछ चिकित्सा संस्थान और एजेंट शामिल हो सकते हैं।
बदलापुर में कार्रवाई के बाद बड़ा खुलासा
महाराष्ट्र के बदलापुर में पुलिस को सूचना मिली थी कि कुछ महिलाएं आर्थिक तंगी का फायदा उठाकर अन्य महिलाओं को अंडाणु दान के नाम पर गुमराह कर रही हैं।
सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की और तीन महिलाओं को हिरासत में लिया।
जांच के दौरान सामने आया कि कई महिलाओं को 15 से 20 हजार रुपये का लालच देकर उनके अंडाणु निकाले गए।
मुख्य आरोपी सुलक्षणा गाडेकर का एक आईवीएफ सेंटर से कथित संबंध सामने आने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क के जरिए कितनी महिलाओं को निशाना बनाया गया।
अंडाशय तस्करी रैकेट
IVF केंद्रों और डॉक्टरों पर निगरानी
जांच एजेंसियों ने इस मामले में कुछ डॉक्टरों और आईवीएफ केंद्रों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या अंडाणु निकासी की पूरी प्रक्रिया कानूनी नियमों के तहत की गई थी या इसमें अवैध लेन-देन और धोखाधड़ी शामिल थी।
भारत में सहायक प्रजनन तकनीक (ART) और आईवीएफ केंद्रों के संचालन के लिए केंद्र सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश बनाए हैं।
इन नियमों की जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://www.mohfw.gov.in पर उपलब्ध है।
यदि इन नियमों का उल्लंघन हुआ है तो यह गंभीर आपराधिक मामला बन सकता है।
क्या देशभर में फैला है Ovary Trafficking Racket?
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने संदेह जताया है कि यह केवल स्थानीय मामला नहीं हो सकता।
जरूरतमंद महिलाओं से अंडाणु निकालकर उन्हें विभिन्न राज्यों में भेजे जाने की आशंका है।
कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल में संभावित कनेक्शन की जांच जारी है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ एजेंट ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को निशाना बनाते थे।
उन्हें बताया जाता था कि यह एक सामान्य मेडिकल प्रक्रिया है और इससे कोई खतरा नहीं है।
लेकिन कई मामलों में महिलाओं को पूरी जानकारी दिए बिना ही प्रक्रिया कराई गई।
अंडाणु निकासी प्रक्रिया और कानूनी पहलू
अंडाणु दान एक कानूनी और नियंत्रित प्रक्रिया है, बशर्ते इसे निर्धारित चिकित्सा मानकों और सहमति के साथ किया जाए।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की गाइडलाइंस के अनुसार,
किसी भी महिला से अंडाणु लेने से पहले उसकी लिखित सहमति और स्वास्थ्य जांच अनिवार्य है।
संबंधित दिशा-निर्देश https://www.icmr.gov.in पर देखे जा सकते हैं।
यदि किसी महिला को धोखे में रखकर या दबाव डालकर अंडाणु निकाले गए हैं,
तो यह मानव तस्करी और शारीरिक शोषण की श्रेणी में आ सकता है।
इसी आधार पर पुलिस अब सभी संबंधित दस्तावेजों और मेडिकल रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
आर्थिक लालच और शोषण का खेल
जांच में सामने आया है कि महिलाओं को 15 से 20 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था।
हालांकि, बाजार में इन अंडाणुओं की कीमत इससे कई गुना अधिक बताई जाती है।
इससे यह आशंका मजबूत होती है कि दलाल और बिचौलिए भारी मुनाफा कमा रहे थे।
विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता की कमी और आर्थिक संकट ऐसे रैकेट को बढ़ावा देते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को मेडिकल प्रक्रिया के जोखिम और कानूनी अधिकारों की जानकारी नहीं होती, जिसका फायदा उठाया जाता है।
भंडारा में शिशु विक्रय का मामला
इसी बीच महाराष्ट्र के भंडारा जिले में शिशु विक्रय का एक और मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में गोंदिया के एक डॉक्टर पर आरोप है कि उन्होंने एक नवजात शिशु को लगभग 4 लाख 70 हजार रुपये में एक दंपति को बेच दिया।
महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए शिशु को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया।
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दो सप्ताह पहले भी नवजात शिशु विक्रय के मामले में उसी डॉक्टर का नाम सामने आया था।
पुलिस अब दोनों मामलों के बीच संबंध तलाश रही है।
जांच एजेंसियों की व्यापक कार्रवाई
पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से इस पूरे नेटवर्क की जांच कर रहे हैं।
मेडिकल रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन और कॉल डिटेल्स की जांच की जा रही है।
इसके अलावा, यह भी देखा जा रहा है कि क्या अन्य राज्यों में भी इसी तरह के मामले दर्ज हुए हैं।
मानव तस्करी से जुड़े मामलों में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
NCRB की वार्षिक रिपोर्ट https://ncrb.gov.in पर उपलब्ध है, जिससे यह समझा जा सकता है कि देश में मानव तस्करी के मामले किस स्तर पर हैं।
महिलाओं की सुरक्षा और जागरूकता की जरूरत
इस पूरे प्रकरण ने महिला सुरक्षा और स्वास्थ्य अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंडाणु दान जैसी प्रक्रियाओं को लेकर स्पष्ट जानकारी और पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
साथ ही, जरूरतमंद महिलाओं को कानूनी सहायता और परामर्श उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
सरकार द्वारा बनाए गए ART Regulation Act के तहत आईवीएफ केंद्रों को पंजीकरण और नियमित निरीक्षण के दायरे में रखा गया है।
यदि किसी केंद्र ने नियमों का उल्लंघन किया है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
राष्ट्रीय स्तर पर कनेक्शन की तलाश
अंडाशय तस्करी रैकेट के संभावित राष्ट्रीय नेटवर्क की जांच अभी जारी है।
पुलिस का फोकस इस बात पर है कि क्या यह एक संगठित गिरोह है जो विभिन्न राज्यों में फैला हुआ है।
इसके लिए विभिन्न राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
बदलापुर से शुरू हुई यह जांच अब एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे का रूप लेती दिख रही है।
यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह देश के चिकित्सा तंत्र और सामाजिक ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
















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