Hind18: Cancer Cases in India 2035 को लेकर सामने आ रहे आंकड़े देश के लिए गंभीर चेतावनी बनकर उभरे हैं।
भारत में हर दो मिनट में तीन लोगों की कैंसर से मौत हो रही है। यह केवल एक आंकड़ा नहीं,
बल्कि एक ऐसा संकेत है जो आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव की ओर इशारा करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान रुझान जारी रहे, तो 2035 तक स्थिति और अधिक भयावह हो सकती है।
Cancer Cases in India 2035
हर दो मिनट में तीन मौतें: आंकड़ों की डरावनी तस्वीर
केंद्र सरकार के हालिया आंकड़ों के अनुसार, 2025 में देश में 20 लाख से अधिक कैंसर रोगी दर्ज किए गए।
यह संख्या 2024 में लगभग 16 लाख थी।
इससे पहले 2023 में 14.96 लाख, 2022 में 14.61 लाख और 2021 में 14.26 लाख मामले सामने आए थे।
स्पष्ट है कि हर वर्ष कैंसर मरीजों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
यदि इस वृद्धि दर को देखें, तो 2035 तक कैंसर मरीजों की संख्या में कई गुना इजाफा हो सकता है।
भारत में हर साल 10 से 14 लाख नए मरीज पंजीकृत हो रहे हैं, जिनमें से 77 प्रतिशत से अधिक लोगों की मृत्यु होने का अनुमान जताया गया है।
यह आंकड़ा वैश्विक औसत की तुलना में अधिक चिंताजनक है।
पुरुषों में कैंसर से मौत का अनुपात अधिक
कैंसर से होने वाली मौतों में पुरुषों की संख्या महिलाओं की तुलना में अधिक पाई गई है। अंतरराष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान से जुड़े आंकड़ों के अनुसार:
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16.3% मौतें मुंह के कैंसर से
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8% फेफड़ों के कैंसर से
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6.8% पेट के कैंसर से
पुरुषों में विशेष रूप से मुंह के कैंसर के मामलों में तेज वृद्धि देखी गई है, जिसका प्रमुख कारण तंबाकू उत्पादों का सेवन माना जा रहा है।
हालांकि धूम्रपान से जुड़े मामलों में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन मृत्यु दर में वृद्धि एक गंभीर संकेत है।
किन राज्यों में सबसे अधिक मरीज?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में सबसे अधिक कैंसर के मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए—दो लाख से अधिक।
इसके बाद:
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महाराष्ट्र – 1.27 लाख
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पश्चिम बंगाल – 1.18 लाख
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बिहार – 1.15 लाख
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तमिलनाडु – लगभग 98 हजार
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कर्नाटक – लगभग 95 हजार
बिहार और उत्तर प्रदेश में तंबाकू सेवन से जुड़े मुख कैंसर के मामलों की संख्या विशेष रूप से अधिक है।
औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले मजदूरों और खदानों में कार्यरत श्रमिकों में भी कैंसर का खतरा ज्यादा पाया गया है।
महिलाओं में तेजी से बढ़ता खतरा
Cancer Cases in India 2035 का विश्लेषण बताता है कि महिलाओं में भी कैंसर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
विशेष रूप से स्तन कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर, डिम्बग्रंथि कैंसर, मुख कैंसर और कोलोन कैंसर के मामले अधिक सामने आ रहे हैं।
जीवनशैली में बदलाव, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव, असंतुलित आहार और हार्मोनल बदलाव इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्क्रीनिंग सुविधाओं की कमी के कारण महिलाओं में कैंसर का पता अक्सर अंतिम चरण में चलता है।
2035 तक क्या हो सकता है?
विश्व स्तर पर 2022 में दो करोड़ नए कैंसर मरीज पाए गए, जिनमें से 97 लाख की मृत्यु इलाज के दौरान हुई।
यदि भारत में वर्तमान वृद्धि दर जारी रहती है, तो 2035 तक लाखों अतिरिक्त मौतों की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि जनसंख्या वृद्धि, प्रदूषण, बदलती जीवनशैली और तंबाकू सेवन के कारण कैंसर मामलों में 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि संभव है।
इससे सरकारी अस्पतालों और कैंसर उपचार केंद्रों पर भारी दबाव पड़ सकता है।
डॉक्टरों की भारी कमी: बड़ा संकट
भारत में प्रति 2,000 कैंसर मरीजों पर केवल एक डॉक्टर उपलब्ध है।
इसके विपरीत, विकसित देशों में प्रति 100 मरीजों पर एक विशेषज्ञ डॉक्टर होता है।
यह अनुपात बताता है कि समय पर निदान और उपचार में देरी होना स्वाभाविक है।
ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में कैंसर जांच की सुविधाएं सीमित हैं, जिससे मरीज अंतिम स्टेज में अस्पताल पहुंचते हैं।
कैंसर उपचार से संबंधित अधिक जानकारी के लिए आप भारत सरकार के स्वास्थ्य पोर्टल
https://www.mohfw.gov.in और वैश्विक आंकड़ों के लिए https://www.who.int पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
समय पर निदान क्यों जरूरी?
कैंसर से होने वाली अधिकांश मौतें देर से निदान के कारण होती हैं। प्रारंभिक चरण में पहचान होने पर कई प्रकार के कैंसर का सफल इलाज संभव है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, नियमित जांच का अभाव और आर्थिक समस्याएं स्थिति को और गंभीर बना रही हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्क्रीनिंग कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए, तो मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
जीवनशैली का बड़ा प्रभाव
तेजी से बदलती जीवनशैली, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, शारीरिक श्रम में कमी और प्रदूषण कैंसर के जोखिम को बढ़ा रहे हैं।
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तंबाकू और गुटखा
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शराब का सेवन
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मोटापा
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व्यायाम की कमी
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मानसिक तनाव
ये सभी कारक कैंसर की आशंका को बढ़ाते हैं। शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी इन आदतों का प्रभाव दिखाई दे रहा है।
स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती
Cancer Cases in India 2035 केवल एक संभावित आंकड़ा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चेतावनी है।
अस्पतालों में बेड की कमी, आधुनिक मशीनों का अभाव और प्रशिक्षित विशेषज्ञों की कमी बड़ी चुनौती बन सकती है।
सरकार द्वारा जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन उनका प्रभाव ग्रामीण इलाकों में सीमित है।
कैंसर नियंत्रण के लिए बड़े पैमाने पर निवेश, प्रशिक्षित मानव संसाधन और आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार आवश्यक है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
कैंसर केवल स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संकट भी है।
गरीब मजदूर, किसान और औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं।
इलाज की उच्च लागत परिवारों को आर्थिक रूप से तोड़ देती है।
यदि 2035 तक कैंसर मामलों में तेजी जारी रही, तो इसका असर देश की उत्पादकता और आर्थिक विकास पर भी पड़ेगा।















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