Site icon Hind18

Chronic Kidney Disease: 7 खतरनाक संकेत जो बताते हैं कि किडनी की बीमारी है एक साइलेंट किलर…!

Chronic Kidney Disease

Chronic Kidney Disease

Hind18: Chronic Kidney Disease आज वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती हुई गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। किडनी शरीर का वह महत्वपूर्ण अंग है|

जो रक्त को शुद्ध करने, शरीर में पानी और नमक का संतुलन बनाए रखने, रक्तचाप नियंत्रित करने, लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में सहायता करने और विटामिन डी को सक्रिय करने जैसे कई आवश्यक कार्य करता है।

समस्या यह है कि Chronic Kidney Disease शुरुआती चरण में लगभग बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती रहती है।

जब तक मरीज को सूजन, सांस लेने में तकलीफ या पेशाब में कमी जैसे संकेत दिखाई देते हैं|

तब तक अक्सर 60 से 80 प्रतिशत किडनी फंक्शन प्रभावित हो चुका होता है।

इसी वजह से इसे “साइलेंट किलर” कहा जाता है।

गुर्दे की बीमारी को साइलेंट किलर क्यों कहा जाता है?

किडनी चुपचाप अपना काम करती है।

जब उसमें शुरुआती गड़बड़ी शुरू होती है तो शरीर तुरंत कोई गंभीर संकेत नहीं देता।

शुरुआती लक्षण इतने हल्के होते हैं कि अक्सर लोग उन्हें सामान्य थकान, डिहाइड्रेशन या बढ़ती उम्र का प्रभाव समझ लेते हैं।

इनमें शामिल हो सकते हैं:

विशेषज्ञों के अनुसार, जब स्पष्ट लक्षण सामने आते हैं तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। इ

सलिए नियमित जांच बेहद जरूरी है।

किडनी से जुड़ी मूल जानकारी के लिए आप राष्ट्रीय स्वास्थ्य पोर्टल की वेबसाइट देख सकते हैं:
https://www.nhp.gov.in

Chronic Kidney Disease के प्रमुख जोखिम कारक

Chronic Kidney Disease के कुछ प्रमुख जोखिम कारक हैं जिन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है:

1. मधुमेह (Diabetes)

उच्च रक्त शर्करा लंबे समय तक किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।

मधुमेह किडनी फेलियर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
अधिक जानकारी: https://www.diabetes.org

2. उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure)

लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर किडनी की फिल्टरिंग क्षमता को कम कर देता है।
संदर्भ जानकारी: https://www.heart.org

3. हृदय रोग

हृदय और किडनी का स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़ा होता है। हृदय रोग से ग्रसित लोगों में किडनी रोग का खतरा अधिक होता है।

4. पारिवारिक इतिहास

यदि परिवार में किसी को किडनी फेलियर या क्रॉनिक किडनी डिजीज रही है तो जोखिम बढ़ जाता है।

5. बार-बार मूत्र संक्रमण

Repeated urinary tract infections भी धीरे-धीरे किडनी को प्रभावित कर सकते हैं।

6. दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक सेवन

बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक दवाएं लेने से किडनी पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।

7. बढ़ती उम्र

60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में किडनी की कार्यक्षमता स्वाभाविक रूप से कम होने लगती है।

किन परीक्षणों से Chronic Kidney Disease का पता लगाया जा सकता है?

डॉक्टरों के अनुसार, कुछ सरल जांचें किडनी की स्थिति का प्रारंभिक चरण में ही पता लगा सकती हैं।

1. सीरम क्रिएटिनिन टेस्ट

यह रक्त परीक्षण किडनी की कार्यप्रणाली को मापता है।

इससे eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) की गणना की जाती है।

2. eGFR टेस्ट

यह बताता है कि किडनी कितनी प्रभावी ढंग से रक्त को फिल्टर कर रही है।

3. मूत्र एसीआर (Urine Albumin-to-Creatinine Ratio)

यह टेस्ट पेशाब में प्रोटीन की मात्रा की जांच करता है।

शुरुआती किडनी डैमेज का यह एक महत्वपूर्ण संकेत है।

4. नियमित मूत्र परीक्षण

झागदार पेशाब या रक्त की उपस्थिति की पहचान में सहायक।

5. किडनी सोनोग्राफी

संरचनात्मक असामान्यताओं का पता लगाने के लिए उपयोगी।

अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों के लिए देखें:
https://www.kidney.org

किसे और कितनी बार जांच करानी चाहिए?

विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार:

इन सभी को वर्ष में कम से कम एक बार uACR और eGFR टेस्ट अवश्य कराना चाहिए।

यदि आप उच्च जोखिम श्रेणी में नहीं भी आते, तब भी 1–2 वर्ष में एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट कराना लाभदायक हो सकता है।

जल्दी पहचान होने पर क्या किया जा सकता है?

Chronic Kidney Disease का शुरुआती चरण में पता चलने पर इसे नियंत्रित किया जा सकता है और आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।

1. रक्तचाप नियंत्रण

ब्लड प्रेशर को 130/80 mmHg के आसपास नियंत्रित रखना लाभकारी है।

2. ब्लड शुगर नियंत्रण

मधुमेह रोगियों को HbA1c स्तर नियंत्रित रखना चाहिए।

3. संतुलित आहार

4. धूम्रपान से परहेज

Smoking किडनी की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है।

5. नियमित व्यायाम

रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि फायदेमंद है।

6. स्वयं दवा लेने से बचें

ओवर-द-काउंटर दवाओं का उपयोग सीमित करें।

किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?

यह धारणा गलत है कि लक्षण न होना स्वस्थ होने का संकेत है। कई बार Chronic Kidney Disease बिना किसी स्पष्ट संकेत के वर्षों तक बढ़ती रहती है।

भारत और विश्व में बढ़ता खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, जीवनशैली में बदलाव, असंतुलित आहार, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता के कारण Chronic Kidney Disease के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

शहरी क्षेत्रों में मधुमेह और उच्च रक्तचाप की बढ़ती दर इस समस्या को और गंभीर बना रही है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों का उद्देश्य लोगों को नियमित जांच के प्रति जागरूक करना है ताकि किडनी फेलियर जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सके।

कैसे करें बचाव?

Chronic Kidney Disease को रोका जा सकता है यदि समय रहते जांच और उपचार शुरू कर दिया जाए।

विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता और नियमित परीक्षण ही इस साइलेंट किलर के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार हैं।

Exit mobile version