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Economic Survey 2025: 8 अविश्वसनीय आर्थिक सर्वेक्षण तथ्य 2025 – भारत के उद्योग और वित्तीय क्षेत्र में बड़ा सुधार….!!

Economic Survey 2025

Economic Survey 2025

Hind18: Economic Survey 2025 में भारत की आर्थिक वृद्धि और वित्तीय प्रणाली की मजबूती पर गहरी जानकारी दी गई है।

दिसंबर 2025 तक के आंकड़े दर्शाते हैं कि औद्योगिक उत्पादन और वित्तीय क्षेत्र में लगातार सुधार देखा गया है।

यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा के लिए यह तथ्य और अवधारणाएँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

Economic Survey 2025: औद्योगिक उत्पादन में सुधार

दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) और आठ प्रमुख उद्योगों में वृद्धि दर्ज की गई।

कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली जैसे उद्योग कुल IIP का 40.27% हिस्सा हैं।

खनन और बिजली उत्पादन में क्रमशः

6.8% और 6.3% की वृद्धि हुई। विनिर्माण क्षेत्र में कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पादों में 34.9%, मोटर वाहनों, ट्रेलरों और सेमी-ट्रेलरों में 33.5%, और अन्य परिवहन उपकरणों में 25.1% की वृद्धि हुई।

बुनियादी उद्योगों में, सीमेंट का उत्पादन 13.5% बढ़ा और इस्पात का उत्पादन 6.9% बढ़ा, जो निर्माण और अवसंरचना कार्यों की लगातार मांग को दर्शाता है।

बिजली (5.3%), उर्वरक (4.1%), और कोयला (3.6%) में भी वृद्धि हुई।

इन आंकड़ों को देखने के लिए आप IIP रिपोर्ट भी देख सकते हैं।

राजकोषीय प्रबंधन और क्रेडिट रेटिंग

सक्रिय राजकोषीय प्रबंधन ने भारत की वित्तीय विश्वसनीयता को मजबूत किया। 2025 में तीन प्रमुख एजेंसियों ने भारत की संप्रभु क्रेडिट रेटिंग में सुधार किया:

केंद्र सरकार का राजस्व संग्रह वित्त वर्ष 2016-20 में GDP के औसत 8.5% से बढ़कर 2025 में 9.2% (अनंतिम) हो गया।

इसका मुख्य कारण गैर-कॉर्पोरेट करों में वृद्धि है, जो महामारी से पहले 2.4% से बढ़कर 3.3% हुआ।

प्रत्यक्ष करों का हिस्सा महामारी से पहले 51.9% था, जो 2025 में बढ़कर 58.8% हो गया।

आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या 6.9 करोड़ (वित्त वर्ष 2022) से बढ़कर 9.2 करोड़ (वित्त वर्ष 2025) हो गई।

GST संग्रह अप्रैल-दिसंबर 2025 में ₹17.4 लाख करोड़ रहा, जिसमें 6.7% की वृद्धि दर्ज की गई।

समेकित ई-वे बिलों की संख्या में 21% की साल-दर-साल वृद्धि हुई, जो मजबूत लेनदेन गतिविधि को दर्शाती है।

राजकोषीय और वित्तीय स्थिति पर विस्तृत जानकारी के लिए Finance Ministry India की वेबसाइट देखी जा सकती है।

पूंजीगत व्यय और राज्य वित्त

महामारी से पहले सरकार का प्रभावी पूंजीगत व्यय GDP का औसतन 2.7% था, जो महामारी के बाद लगभग 3.9% और वित्त वर्ष 2025 में 4% तक बढ़ा।
राज्यों को विशेष सहायता योजना के तहत पूंजीगत व्यय को GDP का लगभग 2.4% बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

राज्य सरकारों का संयुक्त राजकोषीय घाटा महामारी के बाद लगभग 2.8% पर स्थिर था|

लेकिन वित्त वर्ष 2025 में यह बढ़कर 3.2% हो गया।

2020 से भारत ने अपने सकल सरकारी ऋण-से-GDP अनुपात को लगभग 7.1 प्रतिशत अंक तक कम किया है।

राजकोषीय प्रबंधन पर और जानकारी RBI Reports में उपलब्ध है।

मौद्रिक नीति और वित्तीय सुधार

Economic Survey 2025 में भारतीय रिज़र्व बैंक की मौद्रिक नीतियों को भी प्रमुखता दी गई है। अप्रैल-दिसंबर 2025 में:

मुद्रा गुणक एक वर्ष पहले के 5.70 से बढ़कर 6.21 हो गया, जो वित्तीय मध्यस्थता में सुधार और पर्याप्त तरलता का संकेत है।

अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के बकाया ऋण में वृद्धि:

MSME क्षेत्र को बैंक ऋण:

वित्तीय समावेशन में प्रगति

RBI का वित्तीय समावेशन सूचकांक मार्च 2024 में 64.2 से बढ़कर मार्च 2025 में 67.0 हो गया।

यह सूचकांक बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक और पेंशन क्षेत्रों में पहुंच, उपयोग और गुणवत्ता को मापता है।

भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए Financial Inclusion Portal पर विस्तृत आंकड़े उपलब्ध हैं।

पूंजी बाजार और निवेश

वित्त वर्ष 2026 (दिसंबर 2025 तक) में, प्राथमिक बाजारों से 10.7 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए।

वित्त वर्ष 2022 से 2026 तक, सामूहिक रूप से इक्विटी और ऋण प्रतिभूतियों के माध्यम से 53 लाख करोड़ रुपये जुटाए गए।

इस आंकड़े से यह स्पष्ट है कि भारतीय परिवार अपनी वित्तीय बचत को अधिक सुरक्षित और लाभदायक साधनों की ओर स्थानांतरित कर रहे हैं।

निष्कर्ष नहीं, बल्कि तथ्य

Economic Survey 2025 में प्रस्तुत आंकड़े और सूचकांक यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

औद्योगिक उत्पादन, वित्तीय समावेशन, पूंजीगत व्यय, राजकोषीय स्थिति और मौद्रिक नीतियों की जानकारी से उम्मीदवार परीक्षा में मजबूत तैयारी कर सकते हैं।

यदि आप यूपीएससी तैयारी के लिए इस सर्वेक्षण का अध्ययन करना चाहते हैं, तो Economic Survey PDF डाउनलोड कर सकते हैं।

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