Hind18: Heart Health Warning आज के समय की सबसे गंभीर स्वास्थ्य चिंताओं में से एक बन चुकी है।
भारत में हृदय रोग अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि 30 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है।
स्वास्थ्य रिपोर्टों के अनुसार, देश में हर साल लगभग 25 लाख लोगों की मृत्यु हृदय रोगों के कारण होती है।
यह आंकड़ा अपने आप में एक बड़ा संकेत है कि हमें अपनी जीवनशैली पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीराम नेने ने हाल ही में दो ऐसी प्रमुख आदतों की ओर ध्यान आकर्षित किया है|
जो युवाओं को दिल के दौरे के उच्च जोखिम में डाल रही हैं—लंबे समय तक बैठे रहना और अत्यधिक स्क्रीन टाइम।
भारत में युवाओं के बीच बढ़ता हृदय रोग संकट
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और INDIAB के राष्ट्रीय अध्ययन के अनुसार, देश के लगभग 37 प्रतिशत वयस्क पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करते।
यह निष्क्रिय जीवनशैली सीधे तौर पर हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही है।
केरल में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जो लोग प्रतिदिन औसतन पांच घंटे से अधिक समय तक बैठे रहते हैं|
उनमें अगले पांच वर्षों में गंभीर हृदय रोग विकसित होने का जोखिम 28 प्रतिशत अधिक होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी नियमित शारीरिक गतिविधि को हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक मानता है।
अधिक जानकारी के लिए आप WHO की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं:
https://www.who.int
1. लंबे समय तक बैठे रहना: साइलेंट किलर
Heart Health Warning का पहला बड़ा कारण है—स्थिर बैठना। आधुनिक शहरी जीवनशैली में लोग घंटों कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल के सामने बैठे रहते हैं।
कई लोगों को यह भ्रम होता है कि सप्ताह में दो या तीन दिन जिम जाने से वे स्वस्थ रह सकते हैं।
डॉ. नेने के अनुसार, यदि आप दिन का अधिकांश समय कुर्सी पर बिताते हैं, तो सप्ताह में कुछ घंटों का व्यायाम पर्याप्त नहीं है।
क्यों खतरनाक है अधिक बैठना?
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मांसपेशियों की निष्क्रियता
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शरीर में शर्करा का सही उपयोग न होना
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वजन बढ़ना
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ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल का असंतुलन
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हाई ब्लड प्रेशर का खतरा
मांसपेशियां शरीर में ग्लूकोज को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब शरीर सक्रिय नहीं होता, तो शर्करा का स्तर बढ़ सकता है|
जिससे मधुमेह और हृदय रोग का खतरा बढ़ता है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) भी लंबे समय तक बैठने को हृदय रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल करता है। अधिक जानकारी के लिए देखें:
https://www.heart.org
2. अत्यधिक स्क्रीन टाइम: डिजिटल स्ट्रेस का प्रभाव
भारत में औसतन एक व्यक्ति प्रतिदिन सात घंटे से अधिक समय स्क्रीन पर बिताता है। यह केवल आंखों या मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं है|
बल्कि Heart Health Warning का एक बड़ा संकेत है।
स्क्रीन टाइम से हृदय पर कैसे पड़ता है असर?
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नोटिफिकेशन से लगातार उत्तेजना
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हृदय गति में वृद्धि
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तनाव हार्मोन (कॉर्टिसोल) का बढ़ना
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नींद की गुणवत्ता में गिरावट
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रक्तचाप में वृद्धि
डॉ. नेने इस स्थिति को “नोटिफिकेशन की बाढ़” कहते हैं। जब फोन लगातार बजता है या स्क्रीन पर अलर्ट आते रहते हैं|
शरीर आराम की स्थिति में नहीं जा पाता। इससे सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय रहता है, जो लंबे समय में हृदय पर दबाव डालता है।
तनाव, नींद और हृदय स्वास्थ्य का गहरा संबंध
Heart Health Warning केवल शारीरिक गतिविधि तक सीमित नहीं है। मानसिक तनाव और अनियमित नींद भी उतने ही जिम्मेदार हैं।
2023 में प्रकाशित एक भारतीय अध्ययन के अनुसार, लंबे समय तक उच्च स्तर का तनाव हार्मोन रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल असंतुलन के जोखिम को दोगुना कर सकता है।
खराब नींद के प्रभाव:
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शरीर में सूजन बढ़ना
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हार्मोनल असंतुलन
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हृदय गति में अनियमितता
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मोटापा
नेशनल स्लीप फाउंडेशन के अनुसार, वयस्कों को प्रतिदिन 7–9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेनी चाहिए। अधिक जानकारी:
https://www.sleepfoundation.org
शहरी जीवनशैली और बदलते कार्य पैटर्न
वर्क फ्रॉम होम, लंबे ऑफिस घंटे और डिजिटल निर्भरता ने जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है।
पहले जहां लोग अधिक शारीरिक रूप से सक्रिय रहते थे, वहीं अब अधिकांश कार्य स्क्रीन आधारित हो गए हैं।
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ऑफिस में 8–10 घंटे बैठना
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घर लौटकर टीवी या मोबाइल देखना
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शारीरिक गतिविधि की कमी
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फास्ट फूड और अनियमित भोजन
यह संयोजन हृदय रोग के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है।
युवाओं में बढ़ते लक्षण
विशेषज्ञों के अनुसार, युवाओं में निम्नलिखित समस्याएं तेजी से देखी जा रही हैं:
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उच्च रक्तचाप
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अनियमित हृदय गति
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सीने में जकड़न
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थकान
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मोटापा
चिंता की बात यह है कि कई युवा इन लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। Heart Health Warning संकेत देती है कि शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेना बेहद जरूरी है।
छोटे बदलाव, बड़ा असर
डॉ. नेने के अनुसार, हृदय स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि:
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हम कितनी देर बैठते हैं
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कितनी बार ब्रेक लेते हैं
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स्क्रीन टाइम कितना है
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तनाव को कैसे संभालते हैं
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नींद कितनी नियमित है
क्या करें?
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हर 30–45 मिनट में खड़े होकर 5 मिनट चलें
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रोज कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलना
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स्क्रीन टाइम सीमित करना
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नोटिफिकेशन बंद करना
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सोने से एक घंटा पहले डिजिटल डिटॉक्स
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नियमित स्वास्थ्य जांच
इन छोटे लेकिन लगातार कदमों से हृदय रोग के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Heart Health Warning क्यों है जरूरी?
भारत में युवाओं में हार्ट अटैक के मामलों में वृद्धि केवल संयोग नहीं है। यह हमारी बदलती जीवनशैली, डिजिटल निर्भरता और मानसिक तनाव का परिणाम है।
यदि समय रहते इन आदतों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो ये “खामोश हत्यारे” साबित हो सकते हैं।
Heart Health Warning हमें याद दिलाती है कि स्वस्थ हृदय के लिए केवल जिम जाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे दिन सक्रिय रहना, मानसिक शांति बनाए रखना और डिजिटल संतुलन रखना उतना ही आवश्यक है।
हृदय स्वास्थ्य कोई एक दिन का प्रयास नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जीवनशैली का परिणाम है।
















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