Hind18: Malad School POCSO Case बदलापुर के एक स्कूल में एक बच्ची के साथ दुर्व्यवहार की घटना से समाज अभी भी विचलित है, वहीं मुंबई के मलाड स्थित एक स्कूल में भी ऐसी ही घटना घटी है। इसी स्कूल के 35 वर्षीय एक छात्र ने चार वर्षीय बच्ची को धमकाया और उसके साथ दुर्व्यवहार किया। अभिभावकों की शिकायत पर आरोपी और स्कूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
यह घटना 12 जनवरी को घटी थी। हालांकि, लड़की ने हाल ही में अपने माता-पिता को इसके बारे में बताया, जिसके बाद उन्होंने 6 फरवरी को शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि स्कूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने घटना को दबाने की कोशिश की। माता-पिता का आरोप है कि स्कूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने मानहानि के डर से लड़की के माता-पिता पर घटना का खुलासा न करने का दबाव डाला। पुलिस द्वारा आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने पर उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
Malad School POCSO Case
यह घटना 12 जनवरी को स्कूल परिसर के भीतर घटी थी। पीड़ित नाबालिग छात्रा उस समय भय और मानसिक दबाव में थी, जिस कारण वह तुरंत अपने माता-पिता को पूरी बात नहीं बता सकी।
हालांकि, हाल ही में जब बच्ची ने हिम्मत जुटाकर अपने माता-पिता को घटना के बारे में बताया, तो परिवार ने बिना देरी किए 6 फरवरी को पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, स्कूल परिसर के भीतर ही छात्रा के साथ आपत्तिजनक हरकत की गई, जो सीधे तौर पर POCSO Act के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।
आरोपियों की पहचान
Malad School POCSO Case में पुलिस ने दो प्रमुख आरोपियों को नामजद किया है:
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अनिल पंचाल (30 वर्ष) – स्कूल कांस्टेबल
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अनंत याग्निक (65 वर्ष) – स्कूल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 74, 351(2) और POCSO Act की धारा 10, 17 और 21(2) के तहत मामला दर्ज किया है। अदालत में पेश किए जाने के बाद दोनों को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।
घटना दबाने का गंभीर आरोप
मामले में सबसे चौंकाने वाला आरोप स्कूल प्रबंधन की भूमिका को लेकर सामने आया है। पीड़िता के माता-पिता का आरोप है कि स्कूल के सीईओ अनंत याग्निक ने मानहानि के डर से उन्हें इस घटना को सार्वजनिक न करने और पुलिस में शिकायत दर्ज न कराने का दबाव डाला।
परिजनों के अनुसार, स्कूल की छवि खराब होने के नाम पर उन्हें मानसिक रूप से डराया गया और मामले को “आंतरिक रूप से सुलझाने” का सुझाव दिया गया। यह कृत्य स्वयं में POCSO कानून के तहत दंडनीय अपराध है, क्योंकि किसी भी यौन अपराध को छिपाने की कोशिश कानूनन अपराध मानी जाती है।
पुलिस जांच की दिशा
पुलिस ने Malad School POCSO Case की जांच को गंभीरता से लेते हुए कई अहम कदम उठाए हैं:
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पीड़िता का विस्तृत बयान दर्ज किया जा रहा है
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स्कूल परिसर के CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं
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स्कूल स्टाफ का पृष्ठभूमि रिकॉर्ड जांचा जा रहा है
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प्रबंधन की भूमिका की भी अलग से जांच की जा रही है
विद्यालय सूत्रों के अनुसार, यह भी देखा जा रहा है कि क्या पहले भी किसी प्रकार की शिकायतों को दबाया गया था।
अभिभावकों में गुस्सा और डर
इस घटना के बाद मलाड क्षेत्र में अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्कूल जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली जगह पर इस तरह की घटना ने माता-पिता के मन में डर पैदा कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों और अभिभावक संगठनों की प्रमुख मांगें हैं:
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आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा
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संबंधित स्कूल की मान्यता रद्द की जाए
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शिक्षा विभाग और प्रशासन की जवाबदेही तय हो
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सभी स्कूलों में अनिवार्य सुरक्षा ऑडिट
स्कूल प्रबंधन पर उठते सवाल
Malad School POCSO Case ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कई निजी स्कूलों में सुरक्षा व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है। सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या स्कूलों में नियुक्त सुरक्षाकर्मियों की पृष्ठभूमि जांच वास्तव में की जाती है या नहीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों में:
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नियमित POCSO जागरूकता प्रशिक्षण
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शिकायत के लिए स्वतंत्र आंतरिक समिति
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CCTV निगरानी की नियमित ऑडिटिंग
जैसे कदम अनिवार्य किए जाने चाहिए।
कानून क्या कहता है?
भारत में बच्चों के यौन शोषण से संबंधित मामलों के लिए POCSO Act, 2012 लागू है, जो न केवल अपराधियों को दंडित करता है बल्कि अपराध को छिपाने वालों को भी सजा का प्रावधान करता है।
POCSO कानून की जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं:
👉 https://www.indiacode.nic.in
देश में बच्चों के खिलाफ अपराधों के आंकड़ों के लिए:
👉 https://ncrb.gov.in
स्कूल सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देश:
👉 https://www.education.gov.in
समाज के लिए चेतावनी
Malad School POCSO Case केवल एक घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए चेतावनी है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर किसी भी स्तर पर लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अभिभावक, स्कूल और प्रशासन मिलकर जिम्मेदारी नहीं निभाते, तो ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी।
