Hind18: Mobile Recharge Platform Fee आज के समय में लाखों मोबाइल यूजर्स के लिए एक छुपा हुआ खर्च बन चुका है। डिजिटल पेमेंट और UPI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मोबाइल रिचार्ज, बिजली बिल, गैस बिल और अन्य यूटिलिटी पेमेंट पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गए हैं। लेकिन इसी सुविधा के साथ कई प्राइवेट प्लेटफॉर्म्स ने यूजर्स से अतिरिक्त शुल्क वसूलना भी शुरू कर दिया है, जिसे प्लेटफॉर्म फीस कहा जाता है।
कई बार यूजर 100 रुपये का मोबाइल रिचार्ज करता है, लेकिन उसके बैंक अकाउंट से 103 या 104 रुपये कट जाते हैं। यह अतिरिक्त राशि Mobile Recharge Platform Fee के रूप में ली जाती है, जिसकी जानकारी अक्सर अंतिम पेमेंट स्क्रीन पर दी जाती है, लेकिन जल्दबाजी में यूजर उसे नजरअंदाज कर देता है।
क्या है Mobile Recharge Platform Fee और क्यों ली जाती है?
Mobile Recharge Platform Fee वह अतिरिक्त चार्ज होता है जो कुछ थर्ड पार्टी UPI ऐप्स और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स मोबाइल रिचार्ज या बिल भुगतान की सुविधा देने के बदले यूजर्स से लेते हैं। यह शुल्क कभी फिक्स अमाउंट (जैसे 2–5 रुपये) तो कभी ट्रांजैक्शन वैल्यू के प्रतिशत के रूप में लगाया जाता है।
डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक, कई प्लेटफॉर्म्स इसे “कन्वीनियंस फीस”, “सर्विस चार्ज” या “प्लेटफॉर्म फीस” जैसे नामों से जोड़ते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की गाइडलाइंस के अनुसार, UPI ट्रांजैक्शन पर सीधे शुल्क नहीं लिया जा सकता, लेकिन वैल्यू-ऐडेड सर्विस के नाम पर कुछ प्लेटफॉर्म यह चार्ज जोड़ देते हैं।
अधिक जानकारी के लिए RBI की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है।
Mobile Recharge Platform Fee से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या
सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह शुल्क छोटा होने के कारण यूजर्स को ज्यादा महसूस नहीं होता। लेकिन जब कोई यूजर महीने में 4–5 बार मोबाइल रिचार्ज, डेटा पैक, DTH या अन्य बिलों का भुगतान करता है, तो यह छोटी रकम धीरे-धीरे बड़ा खर्च बन जाती है।
डिजिटल पेमेंट एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर कोई यूजर हर ट्रांजैक्शन पर औसतन 3 रुपये अतिरिक्त देता है, तो सालभर में यह रकम 150–200 रुपये या उससे ज्यादा हो सकती है।
ट्रिक 1: पेमेंट से पहले फाइनल अमाउंट जरूर चेक करें
Mobile Recharge Platform Fee से बचने का सबसे आसान तरीका है पेमेंट से पहले फाइनल अमाउंट को ध्यान से देखना। अधिकतर UPI ऐप्स पेमेंट कन्फर्मेशन स्क्रीन पर पूरा ब्रेकअप दिखाते हैं।
अगर रिचार्ज अमाउंट 100 रुपये है और टोटल पेमेंट 103 या 104 रुपये दिख रहा है, तो इसका मतलब है कि प्लेटफॉर्म फीस जोड़ी गई है। ऐसे में “Pay Now” पर क्लिक करने की बजाय बैक जाकर किसी दूसरे ऐप या विकल्प का इस्तेमाल करना समझदारी होगी।
ट्रिक 2: टेलीकॉम कंपनी के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से करें रिचार्ज
Mobile Recharge Platform Fee से बचने का दूसरा प्रभावी तरीका है कि थर्ड पार्टी ऐप्स की बजाय सीधे टेलीकॉम कंपनी के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से रिचार्ज किया जाए।
जैसे:
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Jio यूजर्स MyJio ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं
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Airtel यूजर्स Airtel Thanks ऐप
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VI यूजर्स Vi App
इन आधिकारिक प्लेटफॉर्म्स पर आमतौर पर कोई अतिरिक्त प्लेटफॉर्म फीस नहीं ली जाती। इसके अलावा यहां एक्सक्लूसिव ऑफर्स, बोनस डेटा और कैशबैक मिलने की संभावना भी रहती है।
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की वेबसाइट पर भी इससे जुड़ी जानकारी उपलब्ध है।
https://www.trai.gov.in
ट्रिक 3: बैंकिंग और सरकारी UPI ऐप्स का इस्तेमाल करें
Mobile Recharge Platform Fee से बचने का तीसरा और सबसे भरोसेमंद तरीका है बैंकिंग और सरकारी UPI ऐप्स का उपयोग करना। कई बैंक अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप में UPI के जरिए रिचार्ज और बिल भुगतान की सुविधा देते हैं, जहां किसी तरह की अतिरिक्त फीस नहीं ली जाती।
इसके अलावा कुछ सरकारी समर्थित UPI प्लेटफॉर्म्स भी बिना एक्स्ट्रा चार्ज के सेवाएं देते हैं। ऐसे ऐप्स का फायदा यह है कि इनमें ट्रांसपेरेंसी ज्यादा होती है और छुपे हुए चार्ज की संभावना कम रहती है।
डिजिटल इंडिया पहल के तहत सरकार कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा दे रही है, जिसकी जानकारी आप आधिकारिक पोर्टल पर देख सकते हैं।
https://www.digitalindia.gov.in
Mobile Recharge Platform Fee से जुड़ी जागरूकता क्यों जरूरी है?
आज के डिजिटल युग में UPI पेमेंट हमारी रोजमर्रा की जरूरत बन चुका है। ऐसे में Mobile Recharge Platform Fee जैसे छोटे लेकिन लगातार लगने वाले चार्ज पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। सही जानकारी और थोड़ी सी सतर्कता से यूजर न केवल पैसे बचा सकता है, बल्कि अपने डिजिटल फाइनेंस को भी बेहतर तरीके से मैनेज कर सकता है।
फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यूजर्स को हमेशा ऐसे प्लेटफॉर्म चुनने चाहिए जो ट्रांसपेरेंट चार्ज स्ट्रक्चर देते हों और किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क साफ-साफ दिखाते हों।
हर महीने कितनी हो सकती है बचत?
अगर कोई यूजर महीने में:
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2 मोबाइल रिचार्ज
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1 DTH रिचार्ज
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1 बिजली या गैस बिल
और हर ट्रांजैक्शन पर औसतन 3–4 रुपये Mobile Recharge Platform Fee देता है, तो महीने में 12–16 रुपये और सालभर में 150–200 रुपये तक की बचत संभव है। यह रकम छोटी लग सकती है, लेकिन लंबे समय में यह अनावश्यक खर्च से बचाव का बड़ा उदाहरण है।
