Hind18: MP School Repair Scam ने मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है।
मैहर जिले के रामनगर ब्लॉक में स्कूलों की मरम्मत और रखरखाव के नाम पर हुए करोड़ों रुपए के घोटाले का मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया है।
इस मामले में अब तक 17 लोगों को सस्पेंड किया जा चुका है और संबंधित ठेकेदारों पर भी एफआईआर दर्ज की गई है।
इतना ही नहीं, प्रदेश भर के स्कूलों में हुए कार्यों की व्यापक जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
MP School Repair Scam
4 करोड़ से ज्यादा का घोटाला, 17 पर कार्रवाई
रामनगर ब्लॉक में स्कूल मरम्मत के नाम पर पहले लगभग 2 करोड़ रुपए की अनियमितता उजागर हुई थी।
बाद में एसडीएम की अध्यक्षता में हुई जांच में यह राशि 4 करोड़ रुपए से अधिक पाई गई।
जांच के बाद बीईओ सहित 17 प्राचार्यों और एक चपरासी को निलंबित कर दिया गया।
सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। जिन ठेकेदारों ने फर्जी बिल लगाकर भुगतान लिया,
उनके खिलाफ भी कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बिना वास्तविक मरम्मत कार्य किए ही भुगतान कर दिया गया।
कई स्कूलों में कागजों में मरम्मत दिखाई गई, लेकिन जमीन पर काम नहीं हुआ।
इस पूरे घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधानसभा तक पहुंची गूंज
यह मामला राज्य विधानसभा तक पहुंचा। मैहर से भाजपा विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रदेश के स्कूलों की मरम्मत और रखरखाव की आड़ में संगठित आर्थिक अपराध हो रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के संचालक,
उप संचालक और संयुक्त संचालक स्तर के अधिकारी निजी ठेकेदारों को भेजकर बिना टेंडर कार्य करवा रहे हैं।
कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह मामला सार्वजनिक न होता तो दबा दिया जाता।
उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ से एक ‘कॉकस’ बना लिया है।
उन्होंने तीन वर्षों के सभी कार्यों की जांच की मांग की।
मंत्री का बयान और सख्त संकेत
स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने विधानसभा में स्वीकार किया कि रामनगर में गंभीर विसंगतियां सामने आई हैं।
उन्होंने बताया कि 17 आरोपियों पर केस दर्ज कराया गया है और फर्जी बिल लगाने वाले ठेकेदारों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है।
विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश के बाद मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई अधिकारी जांच को प्रभावित कर सकता है,
तो उसे हटाकर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही पूरे प्रदेश में स्कूल मरम्मत कार्यों की जांच कराने की घोषणा की गई।
बिना टेंडर के काम, सीधे प्रस्ताव
विपक्ष ने आरोप लगाया कि लोक शिक्षण संचालनालय में बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए सीधे प्रस्ताव मंगाए जाते हैं।
यह प्रक्रिया वित्तीय नियमों के विपरीत है। सरकारी कार्यों में पारदर्शिता के लिए ई-टेंडरिंग प्रणाली अनिवार्य मानी जाती है,
जिसकी जानकारी मध्यप्रदेश शासन की आधिकारिक वेबसाइट https://www.mp.gov.in पर उपलब्ध है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टेंडर प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तो यह वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है।
सरकारी वित्तीय नियमों और पारदर्शिता मानकों की विस्तृत जानकारी के लिए भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वेबसाइट https://cag.gov.in पर दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई की पूरी श्रृंखला
घोटाले के खुलासे के बाद कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लिया और बीईओ के निलंबन का प्रस्ताव कमिश्नर को भेजा।
एसडीएम की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण के आधार पर रिपोर्ट तैयार की।
रिपोर्ट में पाया गया कि कई स्कूलों में मरम्मत कार्य केवल कागजों में दर्ज थे।
जांच के बाद:
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बीईओ निलंबित
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17 प्राचार्य सस्पेंड
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एक चपरासी पर कार्रवाई
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संबंधित ठेकेदारों पर एफआईआर
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वित्तीय रिकॉर्ड जब्त
यह कार्रवाई संकेत देती है कि प्रशासन अब इस मामले को उदाहरण बनाकर सख्ती दिखाना चाहता है।
पूरे प्रदेश में जांच के आदेश
MP School Repair Scam का दायरा केवल रामनगर तक सीमित नहीं रहेगा।
मंत्री ने घोषणा की है कि जहां-जहां लोक शिक्षण विभाग के अंतर्गत मरम्मत कार्य हुए हैं,
वहां पिछले तीन वर्षों के रिकॉर्ड की जांच कराई जाएगी। इससे प्रदेश के अन्य जिलों में भी संभावित अनियमितताओं की परतें खुल सकती हैं।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी भुगतान, कार्य आदेश, तकनीकी स्वीकृति और निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा की जाए।
यदि कहीं भी फर्जी बिलिंग या बिना कार्य भुगतान की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा व्यवस्था पर असर
इस घोटाले ने प्रदेश की सरकारी स्कूल व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्कूलों की आधारभूत सुविधाएं पहले से ही चुनौतीपूर्ण हैं।
यदि मरम्मत के नाम पर आवंटित राशि भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती है, तो इसका सीधा असर छात्रों की शिक्षा पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता सुधारने के लिए नियमित सोशल ऑडिट और थर्ड-पार्टी निरीक्षण अनिवार्य होना चाहिए।
शिक्षा क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और जियो-टैग्ड फोटो अपलोड जैसी व्यवस्था प्रभावी साबित हो सकती है।
राजनीतिक और प्रशासनिक संदेश
विधानसभा में सत्ता और विपक्ष दोनों ने इस मुद्दे पर चिंता जताई।
यह दुर्लभ स्थिति थी जब दोनों पक्षों ने एक स्वर में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इससे यह संकेत मिलता है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
MP School Repair Scam ने यह स्पष्ट कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर होने वाली वित्तीय गड़बड़ियां अब छिपी नहीं रहेंगी।
मीडिया की रिपोर्टिंग के बाद प्रशासनिक तंत्र सक्रिय हुआ और त्वरित कार्रवाई की गई।
आगे की संभावनाएं
अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रदेशव्यापी जांच में क्या और कितने मामले सामने आते हैं।
यदि अन्य जिलों में भी इसी तरह की अनियमितताएं मिलती हैं, तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है।
विभागीय स्तर पर स्थानांतरण, निलंबन और आपराधिक प्रकरणों की संख्या बढ़ सकती है।
सरकार के लिए यह परीक्षा की घड़ी है कि वह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कर पाए या नहीं।
फिलहाल, 17 निलंबन और एफआईआर ने स्पष्ट संदेश दिया है कि शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं पर अब सख्ती होगी।
