Site icon Hind18

Nikhil Gupta Case: 7 बड़े खुलासे, अमेरिकी अदालत में कबूलनामा और हत्या की साजिश का पूरा घटनाक्रम….!

Nikhil Gupta Case

Nikhil Gupta Case

Hind18: Nikhil Gupta Case ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।

खालिस्तानी अलगाववादी नेता Gurpatwant Singh Pannun की हत्या की कथित साजिश में भारतीय नागरिक Nikhil Gupta को अमेरिकी अदालत ने दोषी ठहराया है।

अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, गुप्ता ने मैनहट्टन की संघीय अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

यह मामला भारत-अमेरिका संबंधों के लिहाज से भी संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि आरोपों में एक भारतीय सरकारी कर्मचारी का नाम भी सामने आया है।

क्या है पूरा मामला?

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 53 वर्षीय निखिल गुप्ता, जिन्हें ‘निक’ के नाम से भी जाना जाता है|

आरोप है कि उन्होंने न्यूयॉर्क में रह रहे खालिस्तानी अलगाववादी नेता गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रची।

पन्नू दोहरी अमेरिकी-कनाडाई नागरिकता रखते हैं और भारत सरकार द्वारा आतंकवादी घोषित किए जा चुके हैं।

अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गुप्ता ने एक भारतीय सरकारी अधिकारी के निर्देश पर हत्या की योजना तैयार की।

इस मामले में हत्या की साजिश, हत्या के प्रयास की साजिश और मनी लॉन्ड्रिंग सहित तीन गंभीर आरोप लगाए गए थे।

इस मामले की सुनवाई न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की संघीय अदालत में हुई, जहां मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न ने गुप्ता को दोषी पाया।

अब 29 मई 2026 को अमेरिकी जिला जज विक्टर मैरेरो द्वारा सजा सुनाई जाएगी।

गिरफ्तारी और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया

Nikhil Gupta Case में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई भी देखने को मिली।

गुप्ता को 30 जून 2023 को अमेरिकी सरकार के अनुरोध पर Czech Republic में गिरफ्तार किया गया था।

इसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और अंततः 15 जून 2024 को उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया। प्रत्यर्पण के बाद से ही वे ब्रुकलिन की जेल में बंद हैं।

अमेरिकी अभियोजकों का कहना है कि गुप्ता ने इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम से खुद को अंतरराष्ट्रीय ड्रग और हथियार तस्कर के रूप में पेश किया था|

हत्या के लिए कॉन्ट्रैक्ट किलर की तलाश की थी।

भारतीय अधिकारी ‘यादव’ का नाम कैसे आया सामने?

अभियोजन पक्ष ने अदालत में दावा किया कि गुप्ता ने एक भारतीय अधिकारी ‘यादव’ और अन्य लोगों के साथ इलेक्ट्रॉनिक संचार किया था।

यह अधिकारी भारत सरकार के कैबिनेट सचिवालय में कार्यरत बताया गया, जहां भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) का संचालन होता है।

हालांकि भारतीय सरकार ने इन आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि यह कथित कृत्य सरकारी नीति के खिलाफ है।

विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार का इस साजिश से कोई संबंध नहीं है।

अमेरिकी न्याय विभाग की प्रतिक्रिया

अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले को गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा का विषय बताया है।

विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया कि विदेशी धरती पर राजनीतिक हत्या की साजिश अमेरिकी कानून का गंभीर उल्लंघन है।

इस केस से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज और प्रेस विज्ञप्तियां अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं:
https://www.justice.gov

इसके अतिरिक्त, संघीय अदालत से जुड़े रिकॉर्ड्स न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं:
https://www.nysd.uscourts.gov

अदालत में गुनाह कबूलनामा

Nikhil Gupta Case का सबसे अहम मोड़ तब आया जब गुप्ता ने मैनहट्टन की संघीय अदालत में अपना गुनाह कबूल कर लिया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार, उन्होंने स्वीकार किया कि वे हत्या की साजिश का हिस्सा थे।

हालांकि इससे पहले प्रत्यर्पण के बाद गुप्ता लगातार अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते रहे थे।

अदालत में कबूलनामे के बाद अब सजा का निर्धारण 29 मई 2026 को किया जाएगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो गुप्ता को लंबी अवधि की जेल सजा हो सकती है।

अमेरिका में हत्या की साजिश जैसे अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है।

भारत की आधिकारिक प्रतिक्रिया

भारत सरकार ने इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि सरकार का इस कथित साजिश से कोई लेना-देना नहीं है।

विदेश मंत्रालय ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि भारत किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि का समर्थन नहीं करता।

सरकार ने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने व्यक्तिगत स्तर पर ऐसा कार्य किया है तो वह भारतीय नीति के खिलाफ है।

भारत-अमेरिका संबंधों के संदर्भ में यह मामला संवेदनशील बना हुआ है, लेकिन दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और सहयोग जारी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और कूटनीतिक पहलू

Nikhil Gupta Case ने वैश्विक स्तर पर राजनीतिक चर्चा को जन्म दिया है।

अमेरिका और भारत दोनों ही लोकतांत्रिक देश हैं और सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी सहयोग तथा रणनीतिक साझेदारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

इस मामले के बाद दोनों देशों के बीच खुफिया सहयोग और कानूनी प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर भी चर्चा तेज हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रत्यर्पण प्रक्रियाओं के लिए एक मिसाल बन सकता है।

आगे क्या?

अब सभी की नजर 29 मई 2026 पर टिकी है, जब अमेरिकी जिला जज विक्टर मैरेरो सजा सुनाएंगे।

अदालत द्वारा दोषी पाए जाने के बाद सजा का निर्धारण इस केस का अंतिम चरण होगा।

इस बीच, यह मामला राजनीतिक, कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

अमेरिकी न्याय व्यवस्था के तहत अब दंड प्रक्रिया पूरी की जाएगी और इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि निखिल गुप्ता को कितनी सजा मिलती है।

Nikhil Gupta Case न केवल एक आपराधिक मुकदमा है|

यह अंतरराष्ट्रीय संबंधों, कूटनीतिक संतुलन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मामला भी बन चुका है।

आने वाले समय में इस केस के फैसले का असर भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक राजनीति पर भी देखा जा सकता है|

Exit mobile version