Hind18: Pakistan-Afghanistan War ने दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति को एक खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है।
डूरंड लाइन पर बढ़ती सैन्य गतिविधियों, हवाई हमलों और जवाबी कार्रवाई ने दोनों देशों के संबंधों को खुली जंग की ओर धकेल दिया है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार धमाकों, गोलाबारी और सैन्य दावों-प्रतिदावों के बीच हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
डूरंड रेखा पर फिर भड़की हिंसा
2,611 किलोमीटर लंबी डूरंड रेखा लंबे समय से अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र रही है।
अफगानिस्तान इस सीमा को औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं करता, जबकि पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है।
इसी ऐतिहासिक विवाद के कारण समय-समय पर दोनों देशों के बीच झड़पें होती रही हैं।
डूरंड रेखा के इतिहास और भू-राजनीतिक पृष्ठभूमि को विस्तार से समझने के लिए आप Britannica की यह रिपोर्ट पढ़ सकते हैं:
https://www.britannica.com/place/Durand-Line
काबुल और सीमावर्ती प्रांतों में हमलों का दावा
तालिबान सरकार के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान ने काबुल,
कंधार और पक्तिया में हवाई हमले किए। शुक्रवार तड़के से राजधानी में धमाकों और युद्धक विमानों की आवाजें सुनी गईं।
हालांकि उन्होंने कहा कि इन हमलों में कोई नागरिक हताहत नहीं हुआ।
अफगान रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि पक्तिया, पक्तिका, खोस्त, नंगरहार, खुमरी और नूरिस्तान क्षेत्रों में चार घंटे तक जवाबी कार्रवाई की गई।
मंत्रालय के अनुसार दो पाकिस्तानी सैन्य अड्डों और 19 चौकियों पर कब्जा कर लिया गया और 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।
अफगानिस्तान की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर अधिक जानकारी के लिए अल जज़ीरा की विश्लेषण रिपोर्ट देखी जा सकती है:
https://www.aljazeera.com/asia/afghanistan/
पाकिस्तान का जवाब और आधिकारिक बयान
पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज किया है। सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार ने कहा कि दो पाकिस्तानी सैनिक शहीद हुए और तीन घायल हुए,
जबकि 36 अफगान लड़ाके मारे गए।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के प्रवक्ता मुशर्रफ अली जैदी ने स्पष्ट किया कि किसी भी पाकिस्तानी सैनिक को बंदी नहीं बनाया गया है।
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा।
पाकिस्तान की आधिकारिक स्थिति और प्रेस विज्ञप्तियां जानने के लिए आप पाकिस्तान सरकार की वेबसाइट देख सकते हैं:
https://www.pakistan.gov.pk
तोरखम सीमा पर बढ़ा सैन्य दबाव
संघर्ष का विस्तार तोरखम तक हो गया है, जो दोनों देशों के बीच एक अहम व्यापारिक और रणनीतिक मार्ग है।
यहां पर भी गोलीबारी और भारी हथियारों के इस्तेमाल की खबरें सामने आई हैं।
सीमा क्षेत्र की सामरिक अहमियत को समझने के लिए आप इस विश्लेषण को पढ़ सकते हैं:
https://www.crisisgroup.org/asia/south-asia/afghanistan
नागरिकों पर असर और मानवीय चिंता
अफगान अधिकारियों के अनुसार नांगरहार में एक शरणार्थी शिविर पर मिसाइल हमले में 13 नागरिक घायल हुए।
कई परिवारों ने सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन शुरू कर दिया है।
सीमावर्ती इलाकों में स्कूल और बाजार बंद कर दिए गए हैं।
मानवाधिकार और मानवीय सहायता से जुड़ी जानकारी के लिए संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी की वेबसाइट देखी जा सकती है:
https://www.unhcr.org
क्षेत्रीय स्थिरता पर असर
Pakistan-Afghanistan War का प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है।
दक्षिण एशिया की स्थिरता और व्यापारिक मार्गों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
पहले कतर की मध्यस्थता से युद्धविराम हुआ था, जिससे अस्थायी शांति स्थापित हुई थी।
लेकिन हालिया घटनाओं ने उस प्रक्रिया को कमजोर कर दिया है।
दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट के लिए आप इस विश्लेषण को देख सकते हैं:
https://www.cfr.org/asia
ऐतिहासिक संदर्भ और मौजूदा तनाव
डूरंड रेखा का विवाद 19वीं सदी से चला आ रहा है।
औपनिवेशिक काल में खींची गई इस सीमा को लेकर अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच लगातार असहमति रही है।
Pakistan-Afghanistan War की मौजूदा स्थिति उसी ऐतिहासिक तनाव की नई कड़ी मानी जा रही है।
सीमा पर बढ़ते सैन्य जमावड़े और आक्रामक बयानों से संकेत मिलते हैं कि हालात अभी भी अस्थिर बने हुए हैं।
दोनों देशों की ओर से किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है,
जिससे वास्तविक स्थिति का स्पष्ट आकलन करना मुश्किल है।















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