Hind18: PM CARES Fund Parliamentary Questions Ban एक बार फिर राजनीतिक और संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है। संसद में प्रधानमंत्री केयर्स फंड, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष और राष्ट्रीय रक्षा कोष से जुड़े सवाल पूछे जाने पर प्रतिबंध को लेकर कई सांसदों ने आपत्ति जताई है। इसी बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने लोकसभा सचिवालय को एक औपचारिक सूचना भेजकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
यह मामला केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जवाबदेही, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक निगरानी जैसे बड़े सवाल भी जुड़े हुए हैं।
संसद में PM CARES Fund से जुड़े प्रश्न क्यों रोके गए?
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, PM CARES Fund Parliamentary Questions Ban इसलिए लागू किया गया है क्योंकि यह फंड और इससे जुड़े अन्य दो कोष — प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) और राष्ट्रीय रक्षा कोष — सरकारी विभाग या मंत्रालय की श्रेणी में नहीं आते।
PMO ने स्पष्ट किया है कि:
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ये फंड सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं हैं
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इनका संचालन कार्यपालिका के नियमित प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत नहीं होता
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इसलिए इन पर पूछे जाने वाले प्रश्न लोकसभा की कार्य प्रक्रिया और कार्यवाही के नियमों के दायरे में नहीं आते
इसी आधार पर लोकसभा सचिवालय को सूचित किया गया कि ऐसे प्रश्नों को स्वीकार नहीं किया जाए।
लोकसभा के नियमों का हवाला क्यों दिया गया?
PM CARES Fund Parliamentary Questions Ban को सही ठहराने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय ने लोकसभा के नियम 41 और 47 का हवाला दिया है। इन नियमों के अनुसार संसद में वही प्रश्न पूछे जा सकते हैं जो:
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किसी मंत्रालय या विभाग के प्रशासनिक कार्य से संबंधित हों
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जिनके लिए सरकार औपचारिक रूप से उत्तरदायी हो
PMO का कहना है कि चूंकि PM CARES Fund एक स्वैच्छिक ट्रस्ट आधारित फंड है, इसलिए उस पर संसद के माध्यम से सवाल पूछना नियमसम्मत नहीं है।
PM CARES Fund की संरचना पर सरकार का पक्ष
PM CARES Fund Parliamentary Questions Ban के पीछे सरकार का तर्क है कि यह फंड आपदा प्रबंधन और आपात स्थितियों में त्वरित सहायता के लिए बनाया गया था। इसमें मिलने वाला धन पूरी तरह स्वैच्छिक होता है और यह किसी कर के रूप में नहीं लिया जाता।
सरकार के अनुसार:
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फंड का उपयोग राष्ट्रीय आपदाओं, स्वास्थ्य संकट और विशेष परिस्थितियों में किया जाता है
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इसका संचालन ट्रस्ट डीड के तहत होता है
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इसमें सरकारी बजट का प्रत्यक्ष उपयोग नहीं किया जाता
इसी वजह से सरकार इसे संसद के प्रश्नकाल के दायरे से बाहर मानती है।
विपक्ष की आपत्ति और उठते सवाल
PM CARES Fund Parliamentary Questions Ban पर विपक्षी दलों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका तर्क है कि:
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जब प्रधानमंत्री स्वयं इस फंड के अध्यक्ष हैं
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जब सरकारी पदों पर बैठे लोग इसके ट्रस्टी हैं
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और जब सार्वजनिक संसाधनों का उपयोग होता है
तो इस पर संसद में सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार होना चाहिए।
कई सांसदों का कहना है कि प्रश्नों पर रोक लगाना जवाबदेही से बचने का तरीका है।
सूचना के अधिकार (RTI) से जुड़ा पहलू
PM CARES Fund Parliamentary Questions Ban के साथ-साथ RTI का मुद्दा भी बार-बार उठता रहा है। सरकार का कहना है कि यह फंड RTI अधिनियम के तहत भी नहीं आता क्योंकि यह सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है।
इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए पाठक भारत सरकार के आधिकारिक पोर्टल
https://www.india.gov.in
पर उपलब्ध सार्वजनिक नियमों और प्रक्रियाओं को देख सकते हैं।
संसद और कार्यपालिका के संबंधों पर असर
PM CARES Fund Parliamentary Questions Ban ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि संसद की निगरानी शक्तियों की सीमा कहां तक है। संसदीय लोकतंत्र में प्रश्नकाल को सबसे प्रभावी औज़ार माना जाता है, लेकिन इस तरह के निर्णय भविष्य में अन्य स्वायत्त निकायों के लिए भी उदाहरण बन सकते हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कोई संस्था पूरी तरह सरकारी नहीं है, तो उस पर संसद की भूमिका सीमित हो सकती है — लेकिन जब उसमें संवैधानिक पदों पर बैठे लोग शामिल हों, तब बहस और गहरी हो जाती है।
आगे क्या हो सकता है?
PM CARES Fund Parliamentary Questions Ban को लेकर आने वाले समय में:
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संसद में नियमों की पुनर्व्याख्या की मांग उठ सकती है
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न्यायिक समीक्षा का रास्ता अपनाया जा सकता है
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या सरकार पारदर्शिता बढ़ाने के लिए स्वैच्छिक खुलासे कर सकती है
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि PM CARES Fund केवल एक राहत कोष नहीं, बल्कि संवैधानिक विमर्श का विषय बन चुका है।
