Hind18: Ramdev Personality Rights Lawsuit को लेकर योग गुरु Baba Ramdev ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे कथित अपमानजनक, व्यंग्यात्मक और पैरोडी कंटेंट को हटाने की मांग की है।
इस याचिका में उन्होंने अपने नाम, उपनाम और पहचान से जुड़े तथ्यों के अनधिकृत उपयोग पर रोक लगाने की अपील की है।
यह मामला केवल एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा का नहीं बल्कि डिजिटल युग में पर्सनालिटी राइट्स बनाम अभिव्यक्ति की आजादी की बहस को भी सामने ला रहा है।
अदालत में सोशल मीडिया कंपनियों और याचिकाकर्ता के बीच तीखी दलीलें देखने को मिलीं।
1. क्या है Ramdev Personality Rights Lawsuit का पूरा मामला?
Ramdev Personality Rights Lawsuit के तहत बाबा रामदेव ने दावा किया है|
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उनके खिलाफ अपमानजनक और भ्रामक कंटेंट साझा किया जा रहा है।
इन पोस्ट्स में उन्हें अलग-अलग संदर्भों में दिखाया गया है, जिनसे उनकी छवि को नुकसान पहुंचता है।
याचिका में विशेष रूप से उनके नामों—‘रामदेव’, ‘स्वामी रामदेव’, ‘बाबा रामदेव’, ‘योग गुरु रामदेव’ और अन्य संक्षिप्त रूपों—के अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग की गई है।
यह मामला Delhi High Court में जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच के समक्ष सुना जा रहा है।
2. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का क्या है पक्ष?
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) ने अदालत में दलील दी कि जिन पोस्ट्स को हटाने की मांग की जा रही है, वे पैरोडी, व्यंग्य या राजनीतिक टिप्पणी की श्रेणी में आते हैं।
कंपनी का कहना है कि यदि ऐसे कंटेंट को हटाने का आदेश दिया जाता है तो यह नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा।
बताया गया कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए 16 लिंक में से 14 पहले ही हटाए जा चुके हैं। शेष कंटेंट पर विचार जारी है।
वहीं, Meta Platforms की ओर से पेश वकील ने कहा कि अपमानजनक कंटेंट हटाने में उन्हें आपत्ति नहीं है|
लेकिन पर्सनालिटी राइट्स के नाम पर वैध न्यूज रिपोर्टिंग को नहीं रोका जा सकता।
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत ने इस प्रकार की व्यापक निषेधाज्ञा पर अभी कोई विचार नहीं किया है।
3. किस तरह के कंटेंट पर जताई गई आपत्ति?
Ramdev Personality Rights Lawsuit में जिन पोस्ट्स को लेकर आपत्ति जताई गई है, उनमें कुछ तस्वीरें और वीडियो शामिल हैं।
इनमें बाबा रामदेव को एलोपैथिक डॉक्टर से इलाज लेते हुए दिखाया गया है।
एक अन्य पोस्ट में उन्हें हाथी पर बैठे हुए दर्शाया गया। कुछ मामलों में पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के संदर्भ में भी उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया।
याचिकाकर्ता के वकील का कहना है कि यह कंटेंट न केवल अपमानजनक है बल्कि उनकी निजता और प्रतिष्ठा के अधिकारों का उल्लंघन करता है।
वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव नायर ने अदालत में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से निष्पक्षता की अपेक्षा की जाती है|
लेकिन वे आपत्तिजनक सामग्री हटाने में अनावश्यक आपत्ति जता रहे हैं।
4. ‘मेरा च्यवनप्राश मुझे एलोपैथी की ओर ले जा रहा’—क्या है विवाद?
Ramdev Personality Rights Lawsuit की सुनवाई के दौरान एक खास पोस्ट का उल्लेख किया गया|
जिसमें कथित रूप से बाबा रामदेव को लेटा हुआ दिखाया गया और यह संकेत दिया गया कि उनका च्यवनप्राश उन्हें एलोपैथी की ओर ले जा रहा है।
यह प्रस्तुति उनके सार्वजनिक रुख और आयुर्वेद से जुड़ी छवि के विपरीत बताई गई है। इसी आधार पर इसे अपमानजनक और भ्रामक कहा गया।
बाबा रामदेव आयुर्वेद और योग के प्रचार-प्रसार के लिए जाने जाते हैं|
वे Patanjali Ayurved से भी जुड़े हैं, जो आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण करती है।
ऐसे में एलोपैथी से जोड़कर बनाई गई पैरोडी को उनकी छवि पर सीधा प्रहार बताया गया।
5. हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिए?
सुनवाई के दौरान जस्टिस ज्योति सिंह ने पाया कि दोनों पक्षों के बीच स्पष्ट असहमति है।
अदालत ने बाबा रामदेव को निर्देश दिया कि वे उन सभी कंटेंट की विस्तृत सूची प्रस्तुत करें, जिन्हें हटवाने की मांग की जा रही है।
साथ ही सोशल मीडिया कंपनियों से कहा गया कि वे अपनी आपत्तियां और कानूनी तर्क लिखित रूप में पेश करें।
मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी को निर्धारित की गई है।
यह आदेश Ramdev Personality Rights Lawsuit को आगे की कानूनी प्रक्रिया की ओर बढ़ाता है|
जहां अदालत को यह तय करना होगा कि व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए।
पर्सनालिटी राइट्स बनाम फ्री स्पीच: कानूनी पृष्ठभूमि
भारत में पर्सनालिटी राइट्स को सीधे तौर पर किसी एक कानून में परिभाषित नहीं किया गया है|
लेकिन यह संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) से जुड़ा माना जाता है।
दूसरी ओर, अनुच्छेद 19(1)(a) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉडरेशन से जुड़े नियमों के लिए आप भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट https://www.meity.gov.in पर जानकारी देख सकते हैं।
इंटरमीडियरी गाइडलाइंस और डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड से संबंधित विवरण https://www.mha.gov.in पर भी उपलब्ध हैं।
Ramdev Personality Rights Lawsuit इसी संवैधानिक संतुलन की परीक्षा बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया और प्रतिष्ठा का सवाल
सोशल मीडिया के दौर में किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व की छवि मिनटों में वायरल कंटेंट से प्रभावित हो सकती है।
ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या पैरोडी और व्यंग्य की आड़ में किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सकता है?
Ramdev Personality Rights Lawsuit इस बहस को राष्ट्रीय स्तर पर ले आया है।
अदालत का अंतिम फैसला आने वाले समय में अन्य सार्वजनिक हस्तियों के लिए भी मिसाल बन सकता है।
आगे क्या?
Ramdev Personality Rights Lawsuit की अगली सुनवाई 18 फरवरी को होगी।
तब तक याचिकाकर्ता को विवादित कंटेंट की सूची पेश करनी होगी और सोशल मीडिया कंपनियों को अपने विस्तृत जवाब दाखिल करने होंगे।
यह मामला न केवल बाबा रामदेव की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जुड़ा है|
बल्कि डिजिटल स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की सीमाएं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी जैसे बड़े सवालों को भी केंद्र में ला रहा है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत किस दिशा में अपना रुख तय करती है।














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