Hind18: Sewerage System Reform के तहत हरियाणा सरकार ने सीवरेज सिस्टम और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) से जुड़े टेंडरों की शर्तों में बड़ा और सकारात्मक बदलाव किया है।
इस नई नीति के अनुसार अब केवल निर्माण कार्य ही नहीं, बल्कि प्लांट के संचालन और रखरखाव (Operation and Maintenance) की जिम्मेदारी भी ठेकेदारों को दी जाएगी।
यह कदम दीर्घकालिक कार्यक्षमता, जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
राज्य सरकार का मानना है कि Sewerage System Reform से शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन की गुणवत्ता में सुधार होगा|
पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी। इस नई व्यवस्था में परियोजनाओं को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया है, जिससे हर स्तर पर स्पष्ट जिम्मेदारी तय हो सके।
तीन श्रेणियों में बांटी गई परियोजनाएं
नई नीति के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:
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40 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) तक की क्षमता वाले STP
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40 एमएलडी से अधिक क्षमता वाले STP
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बिना ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस (O&M) श्रेणी वाले STP
यह वर्गीकरण परियोजना के आकार और जिम्मेदारी के आधार पर किया गया है।
Sewerage System Reform के माध्यम से प्रत्येक श्रेणी के लिए लागत बंटवारा, डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (DLP), O&M अवधि, सिक्योरिटी राशि और परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (PBG) की स्पष्ट शर्तें तय की गई हैं।
40 एमएलडी तक के STP: निर्माण और रखरखाव दोनों की जिम्मेदारी
40 एमएलडी तक की क्षमता वाले एसटीपी के लिए कुल परियोजना लागत का 80 प्रतिशत हिस्सा निर्माण कार्य (कैपिटल वर्क) के लिए निर्धारित किया गया है|
जबकि 20 प्रतिशत हिस्सा ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस के लिए तय किया गया है।
इस 80 प्रतिशत कैपिटल कास्ट का भी स्पष्ट विभाजन किया गया है:
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40 प्रतिशत सिविल वर्क
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40 प्रतिशत मैकेनिकल वर्क
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20 प्रतिशत इलेक्ट्रिकल और इंस्ट्रूमेंटेशन
इस तरह का स्पष्ट वित्तीय ढांचा Sewerage System Reform की पारदर्शिता को दर्शाता है।
इससे यह सुनिश्चित होगा कि परियोजना के हर हिस्से पर संतुलित निवेश हो और तकनीकी गुणवत्ता से समझौता न हो।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स की कार्यप्रणाली और तकनीकी मानकों के बारे में अधिक जानकारी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है:
https://cpcb.nic.in
40 एमएलडी से अधिक क्षमता वाले STP: बड़े प्रोजेक्ट्स पर सख्त निगरानी
40 एमएलडी से अधिक क्षमता वाले एसटीपी बड़े शहरी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इन परियोजनाओं में निवेश और तकनीकी जटिलता दोनों अधिक होती है।
Sewerage System Reform के तहत इन परियोजनाओं में भी निर्माण के साथ-साथ लंबी अवधि तक O&M की जिम्मेदारी ठेकेदारों को सौंपी जाएगी।
सरकार का उद्देश्य यह है कि बड़े प्लांट वर्षों तक सुचारु रूप से संचालित हों और समय-समय पर रखरखाव के अभाव में बंद न पड़ें।
अक्सर देखा गया है कि निर्माण के बाद रखरखाव की अनदेखी से प्लांट अपनी क्षमता के अनुरूप काम नहीं कर पाते।
नई नीति इस समस्या को दूर करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
शहरी विकास और जल प्रबंधन से जुड़े दिशा-निर्देशों के लिए आवास और शहरी कार्य मंत्रालय की वेबसाइट उपयोगी संसाधन प्रदान करती है:
https://mohua.gov.in
बिना O&M श्रेणी वाले STP: केवल निर्माण की जिम्मेदारी
तीसरी श्रेणी उन परियोजनाओं की है, जिनमें केवल सीवरेज नेटवर्क का निर्माण किया जाएगा और ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस शामिल नहीं होगा।
इस श्रेणी में ठेकेदार को केवल निर्माण कार्य पूरा करना होगा।
हालांकि, इसमें तीन वर्ष का डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड (DLP) अनिवार्य रूप से लागू रहेगा।
इस अवधि के दौरान यदि किसी प्रकार की तकनीकी या संरचनात्मक खामी सामने आती है तो उसकी जिम्मेदारी ठेकेदार की होगी।
सिक्योरिटी राशि की वापसी भी चरणबद्ध तरीके से की जाएगी:
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पहले वर्ष के बाद 30 प्रतिशत
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दूसरे वर्ष के बाद 30 प्रतिशत
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तीसरे वर्ष के बाद 40 प्रतिशत
इसके अतिरिक्त परफॉर्मेंस बैंक गारंटी (PBG) की पांच प्रतिशत राशि तीन वर्ष पूरे होने के 45 दिन बाद जारी की जाएगी।
यह व्यवस्था ठेकेदारों को गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्रेरित करेगी।
जवाबदेही और गुणवत्ता पर जोर
Sewerage System Reform का मूल उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि दीर्घकालिक गुणवत्ता और कार्यक्षमता सुनिश्चित करना है।
पहले की व्यवस्था में अक्सर निर्माण के बाद संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी अलग एजेंसियों को दी जाती थी|
जिससे समन्वय की कमी और तकनीकी समस्याएं सामने आती थीं।
नई नीति में एक ही ठेकेदार को निर्माण से लेकर O&M तक की जिम्मेदारी देने से जवाबदेही स्पष्ट होगी।
यदि प्लांट में कोई तकनीकी समस्या आती है तो जिम्मेदारी तय करना आसान होगा।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स का सीधा संबंध पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों की सुरक्षा से है।
बिना उपचारित सीवेज के जलाशयों और नदियों में जाने से प्रदूषण बढ़ता है।
Sewerage System Reform के जरिए सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि प्लांट निर्धारित मानकों के अनुसार काम करें और जल स्रोत सुरक्षित रहें।
राज्य स्तर पर जल एवं स्वच्छता योजनाओं की जानकारी के लिए हरियाणा सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर भी विस्तृत विवरण उपलब्ध है:
https://haryana.gov.in
ठेकेदारों के लिए नई जिम्मेदारी, नई चुनौतियां
इस नई नीति से ठेकेदारों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
अब उन्हें केवल निर्माण गुणवत्ता ही नहीं, बल्कि कई वर्षों तक प्लांट के कुशल संचालन की भी जिम्मेदारी निभानी होगी।
इससे परियोजनाओं में पेशेवर दृष्टिकोण और तकनीकी दक्षता की आवश्यकता बढ़ेगी।
साथ ही, स्पष्ट लागत बंटवारे और बैंक गारंटी जैसी शर्तें वित्तीय अनुशासन को भी मजबूत करेंगी।
ठेकेदारों को बेहतर योजना, आधुनिक तकनीक और कुशल मानव संसाधन के साथ काम करना होगा।
शहरी विकास की दिशा में बड़ा बदलाव
Sewerage System Reform को हरियाणा में शहरी बुनियादी ढांचे के सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
स्पष्ट नियम, चरणबद्ध भुगतान व्यवस्था, O&M की अनिवार्यता और सख्त डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड जैसी व्यवस्थाएं आने वाले वर्षों में सीवेज प्रबंधन प्रणाली को अधिक मजबूत और टिकाऊ बना सकती हैं।
इस नीति से न केवल परियोजनाओं की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद है|
बल्कि सार्वजनिक धन के बेहतर उपयोग और पर्यावरणीय मानकों के पालन को भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
