Hind18: Silent Infections in Pregnancy ऐसी चिकित्सीय स्थिति है जिसमें गर्भवती महिला खुद को पूरी तरह स्वस्थ महसूस करती है,
लेकिन कुछ वायरस और संक्रमण चुपचाप गर्भ में पल रहे शिशु को नुकसान पहुंचा रहे होते हैं।
ये संक्रमण बिना बुखार, दर्द या किसी स्पष्ट लक्षण के भ्रूण के मस्तिष्क, हृदय, आंखों और अन्य अंगों को प्रभावित कर सकते हैं।
यही कारण है कि विशेषज्ञ गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच और स्क्रीनिंग को बेहद जरूरी मानते हैं।
गर्भावस्था एक संवेदनशील अवस्था है, जिसमें मां और शिशु दोनों की प्रतिरक्षा प्रणाली कई बदलावों से गुजरती है।
इस दौरान कुछ संक्रमण ऐसे होते हैं जो मां में ‘एसिम्प्टोमैटिक’ यानी बिना लक्षण के रहते हैं, लेकिन भ्रूण के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकते हैं।
साइटोमेगालोवायरस (CMV): सबसे आम लेकिन अनदेखा खतरा



साइटोमेगालोवायरस (CMV) एक सामान्य वायरस है जो हर उम्र के लोगों को संक्रमित कर सकता है।
अधिक जानकारी के लिए आप CDC की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं: https://www.cdc.gov/cmv/index.html
अधिकांश मामलों में यह वायरस मां में कोई गंभीर लक्षण नहीं दिखाता।
हल्का बुखार, थकान या सर्दी जैसे लक्षण भी कई बार नजरअंदाज हो जाते हैं।
लेकिन यदि यह संक्रमण प्लेसेंटा के जरिए भ्रूण तक पहुंच जाए, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
शिशु पर संभावित प्रभाव:
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सुनने की क्षमता में कमी या स्थायी बहरापन
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विकास में देरी
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दृष्टि दोष
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मस्तिष्क की संरचनात्मक समस्याएं
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दौरे (Seizures)
कुछ बच्चों में जन्म के समय लक्षण नहीं दिखते, लेकिन आगे चलकर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं उभर सकती हैं।
यही वजह है कि Silent Infections in Pregnancy में CMV को विशेष रूप से खतरनाक माना जाता है।
टोक्सोप्लाज्मोसिस: खान-पान और पालतू जानवरों से जुड़ा संक्रमण


टोक्सोप्लाज्मोसिस (Toxoplasmosis) एक परजीवी संक्रमण है जो अधपके मांस, संक्रमित मिट्टी या बिल्लियों की गंदगी के संपर्क में आने से फैलता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार गर्भावस्था में यह संक्रमण भ्रूण के लिए गंभीर हो सकता है।
विस्तृत जानकारी के लिए देखें: https://www.who.int/news-room/fact-sheets/detail/toxoplasmosis
मां को अक्सर कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती।
कभी-कभी हल्का फ्लू जैसा अनुभव हो सकता है, जिसे सामान्य वायरल समझ लिया जाता है।
भ्रूण पर प्रभाव:
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गर्भपात (Miscarriage) का खतरा
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मस्तिष्क में सूजन या क्षति
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आंखों की गंभीर बीमारियां
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जन्म के बाद विकास संबंधी समस्याएं
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गर्भवती महिलाएं कच्चे या अधपके मांस से बचें, बागवानी करते समय दस्ताने पहनें और पालतू बिल्ली की सफाई में सावधानी बरतें।
रूबेला: शुरुआती महीनों में बेहद खतरनाक



रूबेला (Rubella) को जर्मन खसरा भी कहा जाता है। गर्भावस्था के पहले तीन महीनों में यह संक्रमण अत्यंत खतरनाक साबित हो सकता है।
इस वायरस के बारे में अधिक जानकारी के लिए यूनिसेफ की जानकारी देखें: https://www.unicef.org/immunization/rubella
यदि गर्भवती महिला को शुरुआती तिमाही में रूबेला हो जाए, तो बच्चे में ‘कंजेनिटल रूबेला सिंड्रोम’ का खतरा बढ़ जाता है।
संभावित जन्म दोष:
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हृदय संबंधी गंभीर विकार
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सुनने की क्षमता में कमी
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आंखों में मोतियाबिंद
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मानसिक विकास में कमी
रूबेला से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका गर्भधारण से पहले MMR टीकाकरण करवाना है।
जो महिलाएं परिवार की योजना बना रही हैं, उन्हें पहले ही अपनी वैक्सीनेशन स्थिति की जांच करा लेनी चाहिए।
हेपेटाइटिस-बी, सिफलिस और एचआईवी: प्रसव के दौरान संक्रमण का खतरा
हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis B), सिफलिस (Syphilis) और एचआईवी (HIV) भी कई बार बिना स्पष्ट लक्षण के मौजूद रहते हैं।
लेकिन प्रसव के दौरान ये संक्रमण मां से बच्चे में ट्रांसफर हो सकते हैं।
संभावित जोखिम:
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नवजात में लीवर रोग
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जन्म के बाद गंभीर संक्रमण
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मृत शिशु का जन्म
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जीवनभर की स्वास्थ्य जटिलताएं
भारत सहित कई देशों में गर्भावस्था के दौरान इन संक्रमणों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाती है।
समय रहते पहचान और उपचार से बच्चे को संक्रमण से बचाया जा सकता है।
क्यों जरूरी है नियमित जांच?
Silent Infections in Pregnancy की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ये बिना लक्षण के होते हैं।
मां पूरी तरह स्वस्थ दिखती है, लेकिन संक्रमण अंदर ही अंदर भ्रूण को प्रभावित कर रहा होता है।
डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित जांच की सलाह देते हैं:
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नियमित ब्लड टेस्ट
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TORCH प्रोफाइल स्क्रीनिंग
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अल्ट्रासाउंड मॉनिटरिंग
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आवश्यक होने पर विशेष वायरल जांच
इन जांचों के माध्यम से संक्रमण का समय रहते पता लगाया जा सकता है और आवश्यक चिकित्सा कदम उठाए जा सकते हैं।
बचाव के प्रभावी उपाय
गर्भावस्था के दौरान सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। कुछ जरूरी कदम इस प्रकार हैं:
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समय पर सभी जांच करवाएं।
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डॉक्टर द्वारा सुझाए गए ब्लड टेस्ट को नजरअंदाज न करें।
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साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
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कच्चे या अधपके मांस से परहेज करें।
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बागवानी या पालतू जानवरों की सफाई में दस्ताने पहनें।
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गर्भधारण से पहले आवश्यक टीकाकरण जरूर कराएं।
गर्भावस्था केवल शारीरिक ही नहीं, बल्कि चिकित्सकीय सतर्कता का भी समय है।
कई बार जो संक्रमण दिखते नहीं, वही सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इसलिए जागरूकता, नियमित जांच और सही समय पर उपचार ही मां और शिशु दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।















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